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सारंगढ़-बिलाईगढ़// खेती-किसानी के सबसे अहम समय में डीजल की किल्लत झेल रहे किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। बरमकेला-चंद्रपुर रोड स्थित डभरा के यशदेव कृषि सेवा पेट्रोल पंप को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है, जहां किसानों को पर्याप्त डीजल नहीं मिलने और रात के समय व्यापारियों को भरपूर मात्रा में डीजल दिए जाने के आरोप लगे हैं। इस मामले में ग्राम पंचायत डभरा की सरपंच सावित्री सिदार ने 21 मई को तहसीलदार बरमकेला पुष्पेंद्र राज को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन शिकायत के चार दिन बाद भी जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।

शिकायत पत्र में बताया गया है कि कृषि सेवा पेट्रोल पंप में किसानों को कृषि कार्य के लिए महज 5 से 10 लीटर डीजल दिया जा रहा है। किसानों को स्टॉक खत्म होने या डीजल उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है, जबकि रात के समय डब्बों में व्यापारियों और अन्य लोगों को पर्याप्त मात्रा में डीजल दिए जाने की बात कही गई है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि यह पंप कृषि सेवा के उद्देश्य से संचालित है, जहां किसानों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
किसान लाइन में, रात में डीजल सप्लाई के आरोप
क्षेत्र में डीजल संकट पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। किसान ट्रैक्टर और कृषि यंत्र लेकर घंटों पेट्रोल पंपों में लाइन लगा रहे हैं, फिर भी उन्हें जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा। ऐसे में डभरा पेट्रोल पंप को लेकर उठे आरोपों ने किसानों की नाराजगी और बढ़ा दी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन में किसानों को डीजल की कमी बताई जाती है, जबकि रात में बड़े उपभोक्ताओं और व्यापारियों को डीजल उपलब्ध कराया जाता है। यही वजह है कि पंप में डीजल आते ही कुछ ही समय में स्टॉक खत्म होने की चर्चा क्षेत्र में लगातार बनी रहती है।
पूर्व सरपंच ने अधिकारियों और पंप संचालकों पर साधा निशाना
डभरा के पूर्व सरपंच सुशील नायक ने इस पूरे मामले में अधिकारियों और पेट्रोल पंप संचालकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि खेती के मौसम में किसानों को परेशान होना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोगों को आसानी से डीजल मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बरमकेला ब्लॉक के कई पेट्रोल पंपों में रात के समय डीजल का खेल चल रहा है और इसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
सुशील नायक ने कहा कि डभरा का यह पंप नाम से ही स्पष्ट करता है कि इसे कृषि जरूरतों को ध्यान में रखकर संचालित किया जा रहा है। किसानों के लिए अतिरिक्त डीजल आबंटन की व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें 5-10 लीटर देकर स्टॉक खत्म होने की बात कही जा रही है, जबकि रात में क्रेशर, खदान और उद्योग से जुड़े व्यापारियों को 500 से 600 लीटर तक डीजल दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में है।
जांच के आश्वासन पर टिकी निगाहें
मामले पर जिला खाद्य अधिकारी गणेश कुर्रे ने कहा है कि सरपंच द्वारा दी गई शिकायत की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। हालांकि सवाल यह है कि शिकायत के बाद भी यदि जांच जमीन पर नहीं उतरती, तो किसानों का भरोसा कैसे कायम रहेगा।
सरकार और प्रशासन किसानों को राहत देने और डीजल वितरण में पारदर्शिता के दावे कर रहे हैं, लेकिन डभरा पेट्रोल पंप को लेकर सामने आई शिकायत इन दावों को चुनौती देती दिखाई दे रही है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर वास्तव में डीजल वितरण व्यवस्था और कथित सांठगांठ की परतें खुलती हैं।




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