शेयर करें...
रायपुर// छत्तीसगढ़ में सरकार शिक्षकों की समय पर स्कूल पहुंचने को लेकर सख्त है। स्कूलों में शिक्षकों की निगरानी के लिए VSK ऐप, निरीक्षण दल और स्थानीय शिकायत व्यवस्था तक बनाई गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यही नियम शिक्षा विभाग के दफ्तरों में बैठे बाबुओं और कर्मचारियों पर भी लागू होते हैं?
इस सवाल का जवाब खुद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के 7 जुलाई 2026 को जारी एक पत्र ने दे दिया है। यह पत्र साफ बता रहा है कि शिक्षा विभाग के गैर-शैक्षणिक कर्मचारी VSK ऐप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज ही नहीं कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पहला निर्देश नहीं है। डीपीआई ने 12 जून 2026 को भी इसी संबंध में आदेश जारी किया था, लेकिन करीब एक महीने बाद भी स्थिति नहीं बदली। अब फिर से सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश देना पड़ा कि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का VSK ऐप में पंजीयन कराकर उनकी ऑनलाइन उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित कराई जाए।
आखिर VSK ऐप से इतनी दूरी क्यों?
इसके पीछे का गणित बहुत सीधा है। सूत्र बताते हैं कि विभाग के कई कार्यालयों में कर्मचारी निर्धारित समय सुबह 10 बजे की बजाय 11 बजे या 12 बजे तक पहुंचते हैं। वर्षों से चली आ रही इस व्यवस्था पर न कोई निगरानी है और न ही जवाबदेही तय होती है। ऐसे में यदि VSK ऐप से ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य हो गई तो कार्यालय पहुंचने का वास्तविक समय रिकॉर्ड में आ जाएगा। यही वजह है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी ऑनलाइन अटेंडेंस से दूरी बनाए हुए हैं।
शिक्षकों के लिए अलग नियम, बाबुओं के लिए अलग?
सरकारी स्कूलों में यदि कोई शिक्षक समय पर नहीं पहुंचता तो निरीक्षण दल सक्रिय हो जाता है। ग्रामीण शिकायत कर देते हैं, मीडिया में खबरें बनती हैं और कार्रवाई तक हो जाती है। लेकिन शिक्षा विभाग के कार्यालयों में देर से आने वाले कर्मचारियों पर शायद ही कभी कोई सवाल उठता है। यही कारण है कि अब डीपीआई को खुद यह स्वीकार करना पड़ा है कि अधिकांश गैर-शैक्षणिक कर्मचारी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं।
डीपीआई का सख्त निर्देश
डीपीआई ने अपने पत्र में सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधीनस्थ कार्यालयों और शासकीय विद्यालयों में कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का VSK ऐप में पंजीयन कराया जाए और उनकी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज कराना सुनिश्चित किया जाए। डीपीआई का पत्र यह साबित करता है कि शिक्षा विभाग के कार्यालयों में समय पालन को लेकर गंभीर समस्या है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार शिक्षकों की तरह विभागीय कर्मचारियों पर भी समान सख्ती दिखाएगी? या फिर ‘समय पर स्कूल पहुंचे शिक्षक’ और ‘जब मन करे तब दफ्तर पहुंचे बाबू’ वाली व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी?


