भोजली के रंग में सरगांव, लोकगीतों से गूंजा नगर, भोइना तालाब में श्रद्धा के साथ हुआ विसर्जन..

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मुंगेली//सरगांव छत्तीसगढ़ की लोकआस्था, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकता का पर्व भोजली तिहार सोमवार को सरगांव में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही नगर में उत्सव का माहौल रहा और शाम होते-होते पारंपरिक गीतों व जयकारों से सरगांव का वातावरण गूंज उठा।

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कीर्तन मंडली के साथ “देवी गंगा देवी गंगा, जैसे पारंपरिक भोजली गीतों की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। माताओं-बहनों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली की पूजा-अर्चना कर देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भोइना तालाब पहुंचकर भोजली का श्रद्धापूर्वक विसर्जन किया।

इस दौरान सरगांव की गलियों और तालाब परिसर में छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली। पारंपरिक गीत-संगीत, पूजा-अर्चना और सामूहिक सहभागिता ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। लोगों ने एक-दूसरे को भोजली तिहार की शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकपरंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया

आयोजन में भाजपा मंडल अध्यक्ष पोषण यादव, नगर पंचायत अध्यक्ष परमानंद साहू, उपाध्यक्ष पूजा कमल कौशिक, पूर्व अध्यक्ष रामजुडावन साहू, पार्षद महेश साहू, मनोज यादव, जमुना पाड़े, सविता कौशिक, सुषमा यादव, विधायक प्रतिनिधि तरुण अग्रवाल, पवन साहू, शिव पाण्डेय, ललित यादव सहित बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

भोजली बनी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की पहचान

सरगांव में मनाया गया भोजली तिहार इस बात की खूबसूरत मिसाल बना कि लोकपर्व आज भी लोगों को अपनी मिट्टी, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम कर रहे हैं। श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के बीच संपन्न हुआ भोजली विसर्जन सरगांव की जीवंत लोकसंस्कृति की सुंदर तस्वीर पेश किया

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