वरिष्ठ साहित्यकार, अभियंता एवं समाजसेवी हरिबंधु बिशाल नहीं रहे, 24 जुलाई को होगा गंगभोज..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त अभियंता, वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी और आध्यात्मिक चिंतक हरिबंधु बिशाल के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। उन्होंने 13 जुलाई को रायपुर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन को साहित्य, समाज सेवा और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनका गंगभोज 24 जुलाई को ग्राम रिसोरा स्थित उनके निवास पर आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

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रायगढ़ जिले के ग्राम तुरंगा में जन्मे हरिबंधु बिशाल ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर शिक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल कीं। बाद में वे जल संसाधन विभाग में अभियंता बने और रायगढ़ संभाग अभियंता संघ के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे श्री रामचंडी सेवा मंडल केंद्रीय समिति, रायगढ़ के लगातार 10 बार निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। जांजगीर में शासकीय सेवा के दौरान उन्होंने संस्कृत सेवा मंडल की साहित्य शाखा का भी लगभग एक दशक तक नेतृत्व किया।

हरिबंधु बिशाल हिंदी, ओड़िया और छत्तीसगढ़ी भाषा के कुशल साहित्यकार थे। उन्होंने कविता, गीत, लेख और निबंध के माध्यम से साहित्य को समृद्ध किया तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में सम्मान भी प्राप्त किए। सामाजिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विषयों पर उनके सैकड़ों लेख विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए। वे संगीत के भी अच्छे जानकार थे और अपनी कई रचनाओं को स्वयं स्वरबद्ध किया। वे वर्ष 2001 से 2005 तक छत्तीसगढ़ी समाज के प्रांतीय अध्यक्ष भी रहे। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देते हुए उन्होंने ग्राम रिसोरा में भारतीय विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का संचालन किया, जहां गरीब एवं ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

आध्यात्मिक जीवन में भी उनकी विशेष पहचान थी। वे अष्टांग योग के साधक और तत्वज्ञान के प्रवचनकर्ता के रूप में जाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने ग्राम रिसोरा में रहकर नियमित रूप से गीता एवं भागवत ज्ञान की साप्ताहिक व्याख्यान श्रृंखला संचालित की और ध्यान योग के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हरिबंधु बिशाल का जीवन शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा और अध्यात्म का प्रेरणादायी संगम रहा। उनके निधन से क्षेत्र ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी सेवाओं और विचारों को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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