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बिलासपुर// शिक्षा विभाग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रमोशन और युक्तिकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला अब टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। प्रदेश कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने ज्वाइंट डायरेक्टर कार्यालय में विस्तृत शिकायत दर्ज कराते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और उनके कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हाईकोर्ट और DPI आदेशों की अनदेखी का आरोप
अंकित गौरहा का आरोप है कि विभाग ने हाईकोर्ट और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आदेशों को तोड़-मरोड़कर लागू किया। उन्होंने कहा कि जिन पांच शिक्षकों की याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं, उन्हें DPI के निर्देशानुसार पूर्व आदेशों के आधार पर पदस्थापना दी जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बजाय कथित रूप से मनमाने तरीके से पोस्टिंग बदल दी गई, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर न्यायालय की भावना के खिलाफ बताया।
खारिज याचिकाओं के बाद भी मनचाही पोस्टिंग
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिलीभगत कर अपनी पोस्टिंग बदलवाई। इसी तरह का पैटर्न अन्य मामलों में भी अपनाया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अंकित गौरहा ने दावा किया कि युक्तिकरण प्रक्रिया में हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समिति का गठन अनिवार्य था, लेकिन इसे दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 200 से 250 शिक्षकों का युक्तिकरण मनमानी व्याख्या के आधार पर किया गया, जिससे प्रक्रिया केवल कागजों में वैध दिखाई दी।
कलेक्टर को अंधेरे में रखने का आरोप
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले में जिला प्रशासन को पूरी जानकारी नहीं दी गई और कलेक्टर के अधिकारों का उपयोग करते हुए आदेश जारी किए गए। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।27 दिसंबर 2024 को हुए प्रमोशन और मार्च 2026 के आदेशों पर भी आरोप लगे हैं कि वरिष्ठता सूची को नजरअंदाज कर पीछे के क्रमांक वाले शिक्षकों को आगे बढ़ाया गया। इससे पात्र शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
बिना काउंसलिंग जारी हुए आदेश
अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि न तो काउंसलिंग की गई और न ही रिक्त पदों का संतुलन देखा गया। आदेश सीधे जारी कर दिए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर किया गया। अंकित गौरहा ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लोकायुक्त और हाईकोर्ट का रुख करेंगे।



