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जशपुर// भाजपा के ग़द्दावर नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव के पोते शौर्य प्रताप जुदेव ने संगठन में जिम्मेदारी सम्हालने के बाद राजनीतिक विरासत सम्हालने में जुट गए है। शौर्य को सोशल मीडिया में लिटिल जुदेव के रूप में भी जाना जाता है।
सबसे कम उम्र याने 18 वर्ष की उम्र में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा ने जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। संगठन की ओर से दायित्व मिलने के बाद से वह लगातार कार्यकर्ताओं से न केवल सम्पर्क में हैं बल्कि अपने समर्थकों के क्षेत्र में दौरा भी शुरू कर दिया है।
उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद शौर्य शनिवार को पहली बार पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच एक बड़े मंच पर दिखे। इमरजेंसी काल के काले दिन की याद में जिले भर के नेताओं और पदाधिकारियों के बुलाये गए सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आये भाजपा के आदिवासी नेता और राज्यसभा सांसद राम विचार नेताम ने सबसे कम उम्र के भाजयुमो नेता शौर्य की हौसला अफजाई की और उन्हें राजनीति के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करने की शुभकामनाएं दी।
इमरजेंसी काल की बात करें तो इमरजेंसी से शौर्य का गहरा नाता रहा है। शौर्य प्रताप की माँ जशपुर नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष प्रियंवदा सिंह जूदेव ने बताया कि इमरजेंसी काल के दौरान जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जनसंघ का राष्ट्रीय नेतृत्व सम्हाल रहे थे तब उनके दादा अविभाजित बिहार जनसंघ का प्रदेश का नेतृत्व सम्हाल रहे थे तब देश की तात्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी ने 26 जून के ही दिन उनके दादा बसंत नारायण सिंह को जेल दाखिल करवाया था।
आपको बता दें कि शौर्य छग के बड़े सियासी घराना स्व दिलीप सिंह जूदेव के अलावे अविभाजित बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार रामगढ़ स्टेट से भी बिलोंग करते है। रामगढ़ स्टेट उनका ननिहाल है।
रामगढ़ स्टेट हजारी बाग से शौर्य के परनाना बसंत नारायण सिंह हजारी बाग से 4 बार सांसद और 3 बार विधायक रहे। निजी हेलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार करने की परंपरा की शुरुआत रामगढ़ राजघराने के द्वारा ही की गयी थी। कूल मिलाकर छग और झारखण्ड के 2 बड़े सियासी राजघराने से ताल्लुक रखने वाले लिटिल जुदेव का राजनीतिक सफर कैसा होता है यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।


