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कोरबा/ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जहां एक ओर अपने ड्रीम प्लान नरवा, गरुवा, घुरवा बाड़ी योजना के क्रियान्वयन के साथ प्रदेश में बड़ा बदलाव लाने का सपना देख रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर इनके प्रतिनिधि अधिकारी ही उनके सपनों को तोड़ने में कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार से कोई भी योजना भी अछूती नहीं रह गई है।
भ्रष्टाचार के गढ़ बने आदिवासी विभाग में एक नया कारनामा उजागर हुआ है, जो प्रदेश के मुखिया के ड्रीम प्लान को तोड़ने की मात्र एक कड़ी है। जानकारी के अनुसार एक विभागीय सब इंजीनियर के नाम करोड़ो का चेक कटा, जिसे कर्मचारी अधिकारियों में आपस मे बांटने का खुलासा हुआ है। दरसअल आदिवासी विभाग में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिये मुख्यमंत्री से शिकायत की गई है। जिसमें आदिवासी विभाग में निर्माण कार्य के नाम पर हुए भ्रष्टाचार को एक-एक कड़ी को दर्शाया गया है। शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार से मिली जानकारी का जिक्र करते हुए कब कितना रुपये का चेक सब इंजीनियर के नाम कटा, इन सारे तथ्यों का उल्लेख चेक नम्बर के साथ किया है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है- ” विभाग के काम काज को देखने वाले अमरेश तिवारी मूल रूप से शिक्षक है, जो पिछले लंबे समय से विभाग में अटैच होकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे है। पत्र में उल्लेख करते हुए कहा गया है कि एक तरफ जिले में गणित के होनहार टीचरों की कमी है और दूसरी तरफ शिक्षक इंजीनियर बनकर आदिवासी विभाग को दीमक की तरह चट कर रहा है।”
शिकायत पत्र में विभागीय सब इंजीनियर अमरेश तिवारी का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि “आखिरकार इतनी बड़ी राशि खुद के खाते में डालने की मंशा क्या थी? आखिर जरूरत क्यों पड़ी अपने नाम से राशि आहरण करने की वो भी सेलरी एकाउंट में। मतलब साफ है विभाग के अन्य अधिकारियों के सांठगांठ से करोड़ो रूपये का वारा न्यारा किया गया है।”
शिकायत कर्ता की माने तो इस खेल में सब इंजीनियर अमरेश तिवारी के साथ साथ विवादित बाबू अरुण दुबे का भी बड़ा रोल है। जिस कदर डीएमएफ मद की बंदरबांट हुई है, उससे जाहिर है ये तो एक छोटा सा ट्रेलर है पिक्चर तो अभी बांकी है। बहरहाल सब इंजीनियर के नाम से कटे चेक की शिकायत कर मुख्यमंत्री से जांच की मांग की गई है।
इनकम टैक्स कस सकता है शिकंजा
सैलरी एकाउंट में जिस कदर एक बड़े लेनदेन की बात उजागर हुई है। उससे विभागीय सब इंजीनियर पर इनकम टैक्स शिकंजा कस सकता है। आखिर साठ से 70 हजार सैलरी पाने वाले कर्मचारी के खाते में इतना ट्रांजेक्सन कैसे हुआ और किसके इशारे पर हुआ? जांच में टैक्स चोरी का मामला उजागर हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो एक और नया प्रकरण इनकम टैक्स विभाग प्रस्तुत कर सकता है।
जानिए क्या है पूरा मामला
छात्रवासों की समय समय पर मरम्मत के नाम से विभागीय सब इंजीनियर के नाम पर चेक काटा गया है जो इस प्रकार है। सूचना के अधिकार से मिले जानकारी के मुताबिक
दिनांक चेक न. राशि
12.10.2018 215346 450.000
24.01.2019 215375 223500
08.02.2019 215395 249986
08.05.2019 215774 26000
16.05.2019 25681 25000
26.07.2019 255711 77000
28.09.2019 215740 299443
16.12.2019 215484 222816
19.12.2019 215486 358426
09.01.2020 215499 135496
14.01.2020 215502 129674
04.03.2020 215537 108500
22.05.2020 215595 100000
03.06.2020 215606 200000
08.06.2020 215603 174000
17.06.2020 215613 100000


