कोरोना काल मे छत्तीसगढ़ी सिनेमा में अकाल, कलाकारों को हो रही रोजी-रोटी की समस्या..

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रायपुर/ कोरोना काल ने प्रदेश के कला जगत को प्रभावित किया है, जहां एक ओर कलाकारों के सामने रोजी रोटी की समस्या आन पड़ी है वहीं महंगाई ने भी बड़ा रंग दिखाया है, लॉकडाउन जैसे समय में जिस तरह काला बाजारी ने फन उठाया है, वहीं लोक रंग के कलाकारों को भी सड़कों पर सब्जी, कपड़े बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग बीते वर्ष से कोरोना संक्रमण की मार झेल रहा है, न यहां कलाकारों को फिल्में मिल रही हैं और न ही कोई निर्माता-निर्देशक फिल्म बना रहा है, कोरोना ने जैसे मनोरंजन जगत को खत्म ही कर दिया है।

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छत्तीसगढ़ लोकरंग नाचा विधा से पूर्ण है, यहां हर गांव में 2-3 कला समूह संगठित हैं पर इन्हें बीते कोरोना काल से अब के कोरोना काल तक कोई काम नहीं मिला और न ही कहीं आयोजन के लिए सरकार ने स्वीकृति दी, इससे बड़ा प्रभाव कलाकार परिवारों के जीवनस्तर पर पड़ा, उनके सामने रोजी रोटी की समस्या और जीवनयापन के लिए कोई काम करने की मजबूरी आ पड़ी, खबरें यहां तक आई की कलाकार कहीं सब्जी तो कहीं सड़कों पर कपड़े बेच रहे हैं, इस कोरोनाकाल ने फिल्म उद्योग को भी बड़ा धक्का दिया, टेक्नीसीयन से लेकर स्पॉट बॉय तक को रोजी रोटी की समस्या से जुझना पड़ रहा है। कोरोना ने न सिर्फ कला समाज बल्कि हर व्यवसाय को प्रभावित किया है, बाजार लगातार नीचे गया है, महंगाई ने उत्रोत्तर वृद्धी की है, जिस तरह लॉकडाउन ने विकास की दरों को सर के बल गिराया है, शायद इन परिस्थितियों ने मानव जीवन को कई साल पीछे कर दिया है, अब देखना होगा हमारी सरकारें जनआवश्यकताओं और जन भावनाओं को किस तरह सम्मान करती है।

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