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- वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम गायब होने के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे युवाओं पर बरसीं लाठियां।
- राजधानी को बनाया गया छावनी: 25 हजार जवान तैनात, 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर थामी दिल्ली की रफ्तार।
- फ्लाइट के अंदर से CJP प्रमुख दीपके गिरफ्तार; विपक्ष के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित हजारों लोकतंत्र समर्थकों को पुलिस ने जबरन उठाया।
- जनता के संवैधानिक अधिकारों के हनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रविवार को होगी विशेष सुनवाई।
रायपुर// देश की राजधानी दिल्ली में आज लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को कुचलने का एक ऐसा भयावह मंजर देखा गया, जिसने देश के नागरिकों को अघोषित आपातकाल की याद दिला दी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में भारी धांधली और देश के 13 करोड़ नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से दुर्भावनापूर्ण तरीके से काटे जाने के खिलाफ, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और देश के दर्जनों छात्र व किसान संगठनों ने जंतर-मंतर पर महाआंदोलन का आह्वान किया था। लेकिन, युवाओं और आम जनता के इस आक्रोश से घबराई सरकार ने पूरी दिल्ली को एक अभेद्य किले और डिटेंशन कैंप में तब्दील कर दिया।

सुबह से लेकर देर रात तक दिल्ली की सड़कों पर पुलिसिया बल प्रयोग, तानाशाही नाकेबंदी और भारी धरपकड़ का जो खौफनाक सिलसिला चला, उसने साफ कर दिया कि सत्ता जनता के शांतिपूर्ण विरोध से किस कदर डरी हुई है।
सुबह का सन्नाटा और चौतरफा नाकेबंदी: जनता के रास्ते रोके
शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की स्क्रिप्ट सरकार ने शुक्रवार रात से ही लिख दी थी। दिल्ली पुलिस ने बिना कोई ठोस कारण बताए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया और सुबह होते-होते दिल्ली की रफ्तार को जबरन रोक दिया गया।
- मेट्रो और ट्रेनें ठप: दिल्ली मेट्रो के 45 सबसे प्रमुख स्टेशनों के दरवाजे आम जनता के लिए बंद कर दिए गए ताकि कोई भी जंतर-मंतर न पहुंच सके। देश के अलग-अलग राज्यों से दिल्ली आ रहे युवाओं को रोकने के लिए 245 से अधिक यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया गया।
- डिजिटल सेंसरशिप: जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के बड़े हिस्से में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया, ताकि पुलिस की ज्यादतियों की तस्वीरें और वीडियो देश के सामने न आ सकें।
विमान के भीतर घुसकर गिरफ्तारी: दीपके को हिरासत में लिया
जैसे ही CJP के शीर्ष नेता दिल्ली की सीमा में दाखिल हुए, पुलिस ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए उन्हें टारगेट करना शुरू किया। मुंबई से दिल्ली आई फ्लाइट के लैंड होते ही दिल्ली पुलिस के जवान विमान के अंदर घुस गए और CJP प्रमुख अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को बेहद नाटकीय और अपमानजनक ढंग से सीट से उठाकर हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले जारी एक वीडियो में अभिजीत दीपके ने सरकार को ललकारते हुए कहा, “यह तानाशाही की पराकाष्ठा है। सरकार चाहे जितनी लाठियां चला ले या हमें जेलों में डाल दे, 13 करोड़ नागरिकों के हक की यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। आज हर युवा खुद में एक आंदोलन है।” इसी तरह, अलसुबह ही मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी उनके ठिकाने से पुलिस ने उठा लिया।
दोपहर का संग्राम: लाठीचार्ज और 7,000 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी
दोपहर 12 बजे तक जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस का इलाका पुलिस के दमन चक्र का गवाह बना। CJP के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के नेतृत्व में जब हजारों छात्रों और युवाओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़कर पीटा गया और महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई।
सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, शनिवार दिनभर में अभिजीत दीपके समेत लगभग 7,000 आंदोलनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन सभी को मॉडल टाउन के छत्रसाल स्टेडियम और दिल्ली के बाहरी इलाकों में बनाए गए अस्थाई जेलों (डिटेंशन सेंटरों) में ठूंस दिया गया।
इस दमन के खिलाफ जब विपक्ष के चार पूर्व मुख्यमंत्री जिसमें अरविंद केजरीवाल (दिल्ली), ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल), पिनाराई विजयन (केरल), और माणिक सरकार (त्रिपुरा) सड़क पर उतरे, तो दिल्ली पुलिस ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर उन्हें भी बीच सड़क से घसीटकर हिरासत में ले लिया।
शाम की स्थिति: सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, कल फिर होगा महासंग्राम
सरकार की इस दमनकारी नीति के खिलाफ पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। दिल्ली में आम जनता के परिवहन अधिकारों को छीनने और अघोषित कर्फ्यू लगाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक आपातकालीन अवमानना याचिका दायर की गई है। न्यायपालिका ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कल रविवार को इस पर विशेष सुनवाई करने का फैसला किया है।
देर रात तक हिरासत में लिए गए हजारों युवाओं और नेताओं को नहीं छोड़ा गया था, जिससे डिटेंशन सेंटरों के बाहर तनाव का माहौल है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित पूरे विपक्ष ने सरकार की इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
भले ही आज सरकार ने संगीनों और लाठियों के दम पर जंतर-मंतर को खाली करा लिया हो, लेकिन आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। CJP के कार्यवाहक नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि यह दमनकारी कार्रवाई आंदोलन को खत्म नहीं बल्कि और तेज करेगी, और रविवार की सुबह एक बार फिर हजारों युवा जंतर-मंतर की तरफ कूच करेंगे।



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