धूमाभांठा में नल-जल योजना बनी मुसीबत, एक साल से टूटी सड़कों की मरम्मत नहीं; जनपद सदस्य ने जल्द मरम्मत करने अधिकारी को दिया निर्देश..

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सारंगढ़ बिलाईगढ़ // बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत धूमाभांठा के लोग पिछले एक साल से टूटी सड़कों और गलियों की परेशानी झेल रहे हैं। नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए ठेकेदार ने गांव की मुख्य सड़क और दर्जनों गलियों की सीसी रोड को तोड़ दिया था। पाइप डालने का काम तो पूरा हो गया, लेकिन सड़क मरम्मत का नाम तक नहीं लिया गया।

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अब हालत यह है कि कई गलियों में चलना तक मुश्किल हो गया है। जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और धंसान बन चुके हैं। स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर दिन गिरने की कगार पर रहते हैं। कई बच्चे और ग्रामीण फिसलकर चोट भी खा चुके हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक ठेकेदार ने काम पूरा करने के बाद सड़कों को वैसा ही छोड़ दिया। बारिश में हालात और बिगड़ गए। कई महीनों से लोग उम्मीद कर रहे थे कि विभाग या ठेकेदार मरम्मत शुरू करेगा, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। यह लापरवाही अब खुलेआम दिखाई दे रही है और इसका पूरा भार गांव के लोगों को उठाना पड़ रहा है।

जनपद सदस्य मौके पर पहुंची, विभाग को लगाई फटकार

ग्रामीणों की शिकायत बढ़ने पर जनपद सदस्य गणेशी चौहान धूमाभांठा पहुंचीं। उन्होंने घर-घर चलकर समस्या देखी। टूटी सड़कों और कीचड़ भरी गलियों को देखकर उन्होंने मौके पर ही पीएचई विभाग के एसडीओ बी के खरे को फोन लगाया। ग्रामीणों के सामने ही उन्होंने तेजी से मरम्मत शुरू करने का निर्देश दिया। वहीं एसडीओ ने ठेकेदार से बात कर जल्द सुधार कार्य करवाने का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का भरोसा अब कमजोर पड़ चुका है।

ग्रामीणों ने दी चेतावनी: जल्द सुधार नहीं हुआ तो होंगे आंदोलन

धूमाभांठा के लोगों का कहना है कि एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। रोजाना परेशानी झेलना अब संभव नहीं।
उन्होंने बताया कि

  • बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत
  • बीमारों को वाहन में ले जाना मुश्किल
  • बारिश में गलियों में घुटनों तक कीचड़
  • कई जगह सड़कें पूरी तरह टूटकर गड्ढों में बदल गई हैं

गांव वालों ने साफ कहा है कि अगर विभाग और ठेकेदार जल्द कार्रवाई नहीं करते तो वे आंदोलन करेंगे और जिम्मेदारों का घेराव करेंगे।

गांव की मांग

  • तुरंत सड़क और गलियों की मरम्मत
  • ठेकेदार पर कार्रवाई
  • आगे ऐसे कामों में कड़े निर्देश और निगरानी

धूमाभांठा के लोग अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर काम देखना चाहते हैं। गांव की टूटी सड़कों पर चलना लोगों की मजबूरी बन गया है और अब ग्रामीण इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।

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