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सारंगढ़-बिलाईगढ़// केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन जिले के कई गांवों में यह योजना अब भी अधूरी पड़ी हुई है। बरमकेला जनपद पंचायत के ग्राम लिप्ती की स्थिति इस योजना की जमीनी हकीकत बयां कर रही है, जहां करीब दो वर्ष पहले शुरू हुआ पानी टंकी निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जा रहा था। विरोध के बाद काम तो बंद कर दिया गया, लेकिन आज तक दोबारा शुरू नहीं किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार पानी टंकी की केवल नींव और कुछ पिलर बनाए गए थे। निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद गांव के लोगों ने काम रुकवा दिया। इसके बाद न तो निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही अधूरा निर्माण पूरा कराया गया। परिणामस्वरूप आज भी गांव के लोग जल जीवन मिशन के लाभ से वंचित हैं।
मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिला समाधान
इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत लिप्ती के सरपंच सन्यासी सिदार, पंचों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से शिकायत भेजकर घटिया निर्माण की जांच, दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई तथा पुराने निर्माण को हटाकर गुणवत्तापूर्ण तरीके से नई पानी टंकी बनाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि 27 मई को भीखमपुरा में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान भी इस संबंध में आवेदन दिया गया था, लेकिन कार्रवाई के बजाय आवेदन का केवल औपचारिक निराकरण कर दिया गया। इसके अलावा जन शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक न जांच हुई और न ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया।
न टंकी पूरी, न पाइपलाइन, न घर-घर जल कनेक्शन
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पानी टंकी ही अधूरी नहीं है, बल्कि पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। कई घरों तक अब तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जल जीवन मिशन का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
एक गांव नहीं, पूरे जिले में ऐसे कई मामले
जानकारी के अनुसार यह समस्या केवल लिप्ती गांव तक सीमित नहीं है। जिले के कई गांवों में जल जीवन मिशन के तहत कहीं पानी टंकियां अधूरी पड़ी हैं, तो कहीं पाइपलाइन और नल कनेक्शन का काम वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। कई स्थानों पर पाइपलाइन डालने के नाम पर सीसी सड़कें तोड़ दी गईं, लेकिन मरम्मत तक नहीं कराई गई, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुशासन और जीरो टॉलरेंस पर उठ रहे सवाल
राज्य सरकार लगातार सुशासन और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है। लेकिन जब एक ही मामले में ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत, मुख्यमंत्री को आवेदन, सुशासन तिहार में प्रस्तुत ज्ञापन और जन शिकायत पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल उठने लगते हैं।
अब ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए तथा जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कर गांव के प्रत्येक घर तक पेयजल उपलब्ध कराया जाए। फिलहाल यह देखना होगा कि सरकार के सुशासन और जीरो टॉलरेंस के दावे इस मामले में धरातल पर उतरते हैं या यह शिकायत भी अन्य मामलों की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाती है।




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