सभापति अंबालिका ने किया नेत्र दान, बोली मुझे खुशी है मेरे मरने के बाद भी मेरी आंखो से लोग दुनिया देख सकेंगे
सरगांव। नेत्रदान ही सबसे बड़ा दान होता है। मरने के बाद मनुष्य के शरीर के अंगों का कोई मूल्य नहीं रह जाता है। इसलिए मरने से पहले ही आप के शरीर के अंगों को दान कर देना चाहिए। यदि मरने के बाद भी हमारे अंगों से कोई खूबसूरत दुनिया देखे, तो इससे बड़ी खुशी की […]
