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रायगढ़// सेठ किरोड़ीमल के नाम को उपयोग करते-करते करोड़ों के आसामी बन चुके सारे धनपति अब उस नाम का महत्व ही भूल चुके हैं। किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों से होने वाली आय को छिपाने के लिए दूसरे शहरों की प्रॉपर्टी की जानकारी भी छिपाई जा रही है। वहीं रायगढ़ शहर में मौजूद कई संपत्तियां तीन-चार बार पलटी हो चुकी हैं। जूट मिल क्षेत्र में एक राइस मिल भी ट्रस्ट की थी। अब यह किसी और की निजी संपत्ति बन चुकी है।
सेठ किरोड़ीमल लुहारीवाला ने जब रायगढ़ में अपनी अकूत संपत्ति का पहरेदार अपने ही समाज के लोगों को बनाया तो उन्होंने सोचा था कि ये उनकी जनसेना की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन उनको शायद नहीं पता था कि वे बिल्ली को दूध की रखवाली करने को कह रहे हैं। कालांतर में ट्रस्ट की सारी संपत्तियां जनहित से दूर होती गई। ट्रस्ट को पुश्तैनी फर्म की तरह उपयोग किया गया। पिता के बाद पुत्र को अध्यक्ष बना दिया गया।
ट्रस्ट का मूल उद्देश्य पूरा होता तो भी कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन आम आदमी के काम आने के बजाय किरोड़ीमल ट्रस्ट की अरबों की संपत्ति का निजी उपयोग किया जाने लगा। जूट मिल क्षेत्र में एक राइस मिल भी थी जो ट्रस्ट की संपत्ति थी। इसे तीन-चार बार बेचा जा चुका है। इसकी रजिस्ट्री हुए बिना कैसे मालिक बदला, यह जांच का विषय है। आज यह संपत्ति करोड़ों की है।
रायगढ़ शहर में ट्रस्ट की दुकानों को तो एक झटके में बेच दिया गया। कहा जा रहा है कि इसके बदले कैश में ट्रांजेक्शन हो रहा है। ब्लैक मनी का उपयोग किया जा रहा है। राइस मिल की तरह ही गांधीगंज में किरोड़ीमल ट्रस्ट की एक दुकान है। इस दुकान को किराए पर दिया गया था। मामूली किराए की दुकान अब गायब हो चुकी है। इस जगह पर अब दो-तीन मंजिला बड़ी दुकान बन चुकी है। निवास भी बन चुका है। बिना पट्टा रिनीवल और बिना अनुमति के निर्माण करवा लिया गया। नजूल क्षेत्र में तैनात राजस्व निरीक्षकों की जानकारी में पूरा मामला है।
कहां-कहां हैं संपत्तियां
सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट देश में जाना जाता है। हर तीर्थ स्थान पर इस ट्रस्ट की एक धर्मशाला है। हरिद्वार, मथुरा, वृंदावन के अलावा भिवानी में भी ट्रस्ट की संपत्ति है। नई दिल्ली लॉ कॉलेज में ट्रस्ट की ओर से दो सीटें होती थी जो अब नहीं हैं। हरियाणा में कई शहरों में संपत्तियां हैं। शहर में कई जमीनें ट्रस्ट की हैं जिन पर अब कोई और काबिज है। ये जमीनें बेची जा चुकी हैं।


