रसूखदार भू माफिया पार्ट-02: कृषि भूमि से खनन तक, रमेश चंद्र डनसेना के नाम पर खरीदी गई जमीनों को लेकर उठ रहे बड़े सवाल..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया तहसील के ग्राम छैलफोरा में अवैध डोलोमाइट खनन को लेकर उठ रहे सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आने से पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस बार सवालों के केंद्र में हैं ओडिशा के बरगढ़ जिले के ग्राम गठियापाली निवासी रमेश चंद्र डनसेना, जिनके नाम पर खरीदी गई जमीनों में कथित रूप से खनन गतिविधियां संचालित होने की शिकायत की गई थी। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर एक कृषि भूमि में वर्षों से खनन संबंधी गतिविधियों की शिकायतें सामने आने के बाद भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी क्यों बनी हुई है।

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दरअसल, 15 दिसंबर 2025 को ग्राम नौघटा के दीपक पटेल, राजेश वैष्णव, गणेशराम पटेल, दुर्गेश पटेल सहित अन्य ग्रामीण कलेक्टोरेट पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपे थे। शिकायत में उन्होंने उल्लेख किया था कि पटवारी हल्का नंबर 4 अंतर्गत ग्राम छैलफोरा के खसरा नंबर 51/2, 49, 79/4 एवं अन्य भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में कृषि प्रयोजन की भूमि के रूप में दर्ज बताई जाती है, वहां खनन गतिविधियां संचालित हो रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित भूमि के दस्तावेजों में कृषि उपयोग स्पष्ट रूप से अंकित है, फिर भी वहां खदान जैसी स्थिति कैसे निर्मित हो गई, यह जांच का विषय है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ महीनों पहले खसरा नंबर 79/1 में हुए सीमांकन के दौरान लगभग 22 से 24 डिसमिल भूमि का हिस्सा सामने आया, जहां इस वर्ष खनन गतिविधियां होने की बात कही जा रही है। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि आसपास के क्षेत्र में पहले से भी खनन जैसी गतिविधियां संचालित होती रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि भूमि का स्वरूप कृषि है, तो उस पर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाएं और स्वीकृतियां पूरी की गई थीं या नहीं। यही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया है कि क्षेत्र से निकाले गए डोलोमाइट पत्थरों का परिवहन कटंगपाली स्थित हर्ष मिनरल्स तक किए जाने की जांच भी आवश्यक है।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन उसके परिणाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए। इससे ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर शिकायतों पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। यदि सब कुछ नियमानुसार है तो विभाग को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल छैलफोरा की इन जमीनों, रमेश चंद्र डनसेना की भूमिका और कथित खनन गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े हैं, जिनका जवाब अब प्रशासन और खनिज विभाग से अपेक्षित है।

(क्रमशः… अगले अंक में: खनन, परिवहन और दस्तावेजों के बीच उठ रहे नए सवालों पर विशेष रिपोर्ट)

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