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सारंगढ़ बिलाईगढ़// भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध बंदरबांट के खिलाफ सारंगढ़ नगर पालिका परिषद ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। नया तालाब पार स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन को ‘खैरात’ में बांटने के पुराने फैसले को पलटते हुए पालिका ने लीज निरस्त कर दी है। अब गेंद तहसीलदार के पाले में है, जिन्हें इस जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का जिम्मा सौंपा गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला साल 2016 का है, जब नगर पालिका परिषद ने संकल्प क्रमांक 430 के जरिए मधुसूदन बानी (पिता नित्यानंद बानी) को उनके घर के पीछे की 10 \times 41 वर्गफीट सरकारी जमीन ‘अस्थायी लीज’ पर दे दी थी। लेकिन जैसे ही यह मामला परिषद की नई कार्यप्रणाली के रडार पर आया, नियमों की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं।

जागते ही परिषद ने लिया ‘यू-टर्न’
परिषद ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका नियम 2016 की धारा 25 का उपयोग करते हुए पूर्व के उस संदिग्ध फैसले पर पुनर्विचार किया। परिषद ने पाया कि यह लीज नियमों के विरुद्ध दी गई थी। नतीजतन, संकल्प क्रमांक 04 दिनांक 19.05.2025 के माध्यम से उक्त लीज को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की स्वीकृति दे दी गई।
धीरज कहार की शिकायत ने बढ़ाई हलचल
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब वार्ड नंबर 15 रेंजरपारा निवासी धीरज कहार ने जनदर्शन में पत्र सौंपकर कार्रवाई में हो रही देरी पर सवाल उठाए। धीरज कहार की सक्रियता के बाद प्रशासन हरकत में आया है। अब नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने तहसीलदार को सख्त लहजे में पत्र लिखकर इस भूखंड का सीमांकन करने और इसे अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया है।
बेबाक सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?
- यह खबर केवल एक लीज निरस्त होने की नहीं है, बल्कि उन रसूखदारों के लिए चेतावनी है जो सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझ बैठे हैं।
- सवाल यह है कि 2016 में किस दबाव या सांठगांठ के तहत यह लीज दी गई थी?
- सवाल यह भी है कि जब मई 2025 में ही इसे निरस्त करने का निर्णय ले लिया गया था, तो अब तक सरकारी जमीन पर कब्जा क्यों बरकरार है?
- मीडिया की नजर अब इस कार्रवाई पर टिकी है। क्या प्रशासन बिना किसी रसूख के दबाव में आए इस कीमती भूमि को मुक्त करा पाएगा या फाइलें फिर से धूल फांकने लगेंगी?




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