वेदांता प्लांट हादसे में 10 मौत के बाद श्रम मंत्री ने दिये जांच के आदेश, पर क्या जिम्मेदारी तय होगी या फिर जांच के नीचे दफन हो जाएगी सच ?

शेयर करें...

सक्ती// सक्ती के सिंघीतराई स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुआ हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही को एक बार फिर सामने लाने वाली घटना है। हर बार की तरह इस बार भी हादसे के बाद जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के बयान सामने आये है। लेकिन सवाल वही पुराना है कि क्या जांच रिपोर्ट आने के बाद सच में कुछ बदलेगा या फिर जांच के नीचे सच्चाई दफन हो जायेगी ? इस बड़े हादसे के बाद श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

Join WhatsApp Group Click Here

सक्ती के सिंघीतराई स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुए हादसे में अब तक 10 निर्दोष मजदूरों की मौत और 30 से अधिक घायलों का आंकड़ा केवल एक संख्या नही है, बल्कि उन परिवारों की तबाही की कहानी है, जिनके जीवन का पहिया इस हादसे के बाद हमेशा के लिए थम गया। हादसे के बाद शासन-प्रशासन राहत-बचाव कार्य में जुटने के साथ ही पीड़ित परिवारों का दर्द कम करने के प्रयास में है। वहीं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने इस औद्योगिक हादसे की जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों पर श्रम कानून के तहत कार्रवाई होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

खैर इस हादसे के बाद विष्णुदेव सरकार ने जहां पीड़ित परिवारों की दुःख पर मरहम लगाने के लिए मुआवजे की घोषणा की है, वहीं एक बार फिर जांच और कड़ी कार्रवाई के दावे किये गये है। ऐसा पहली बार नहीं है, इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में हुए औद्योगिक हादसों के बाद जांचे हुई, रिपोर्ट आई, दोष तय हुए, लेकिन बीतते समय के साथ जवाबदेही कहीं गुम हो गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं कि क्या एक बार फिर इस औद्योगिक हादसे पर सरकार कोई बड़ा एक्शन लेगी ? या फिर जांच और कार्रवाई कागजों में ही दबकर रह जायेगी ? ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

औद्योगिक इकाई में सुरक्षा मानकों से खिलवाड

सक्ती के वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुए इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन की पोल खोल दी है। अक्सर ये सारे नियम और कानूनों का पालन सिर्फ और सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है। सवाल यह भी है कि क्या राज्य में औद्योगिक सुरक्षा की निगरानी करने वाले तंत्र खुद सक्रिय हैं या सिर्फ हादसों के बाद ही जागते हैं ? अगर नियमित निरीक्षण और सख्त पालन सुनिश्चित होता, तो शायद ऐसे हादसे टाले जा सकते थे।

Scroll to Top