रात्रिगश्त में पकड़ा गया लकड़ी से भरा वाहन, जांच में निकली किसानों की सेमर लकड़ी, दलाली कनेक्शन भी आया सामने..

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सारंगढ़ बिलाईगढ़// रात्रिगश्त के दौरान वन विभाग की टीम ने बरमकेला क्षेत्र के ग्राम लिंजीर चौक के पास लकड़ी से भरे एक संदिग्ध वाहन को रोककर बड़ी कार्रवाई की। अंधेरे में हो रहे इस परिवहन ने टीम के शक को और गहरा कर दिया। वाहन को रोककर पूछताछ की गई तो मामला पहली नजर में संदिग्ध लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी ने अलग ही मोड़ ले लिया।

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जांच में सामने आई असलियत

वाहन चालक ने बताया कि गाड़ी में भरी लकड़ी सेमर की है, जिसे किसानों ने बेचा है। इसके बाद वाहन को निस्तार डिपो बरमकेला ले जाकर विस्तार से जांच की गई। मौके पर मिले तथ्यों और खेतों में मौजूद ठूंठ से यह साफ हो गया कि लकड़ी वास्तव में किसानों के खेतों से ही काटी गई थी।

किसानों से खरीदी, बीच में दलाल की एंट्री

जांच में यह भी सामने आया कि हेमलता पिता आत्माराम (टीटहीपाली), प्रेमलाल सिदार, जीतराम सिदार और लछीदर सिदार ने अपनी लकड़ी रायपुर निवासी विक्रम राव को बेची थी। इस पूरे सौदे में राकेश कुमार चौहान द्वारा दलाली किए जाने की बात भी उजागर हुई, जिसने किसानों और खरीदार के बीच कड़ी का काम किया।

दस्तावेज सही, वाहन छोड़ा गया

ग्राम पंचायत के सरपंच और पंचों द्वारा लिखित अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें लकड़ी को किसानों की संपत्ति बताया गया। दस्तावेज सही पाए जाने पर उच्च अधिकारियों को जानकारी देकर वाहन को छोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से मौके पर मौजूद रही। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद रही, जिसमें मिलन भगत (डिप्टी रेंजर), छत्र मोहन नायक, वारले राठिया, मैत्री दरोगा और विजय कुमार भोय शामिल रहे।

बड़ा सवाल बना हुआ है

जब लकड़ी पूरी तरह वैध थी, तो उसका परिवहन रात के अंधेरे में क्यों किया जा रहा था? क्या इसमें दलालों की भूमिका पर और सख्ती की जरूरत है? इस कार्रवाई ने एक बार फिर दिखा दिया कि वैध और अवैध के बीच की रेखा कितनी पतली होती है। अब निगाहें ऐसे मामलों और दलाली नेटवर्क पर टिकी रहेंगी।

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