बाढ़ के बाद चक्रवात ‘अर्नव’ ने भी किसानों की तोड़ी कमर, खेतों में बिछी धान की फसल से बढ़ी चिंता..

शेयर करें...

सारंगढ़-बिलाईगढ़// इस साल किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले महानदी में आई भीषण बाढ़ ने तटवर्ती गांवों के किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया और अब चक्रवात ‘अर्नव’ के असर से हुई तेज बारिश और आंधी ने बची हुई फसल पर भी संकट खड़ा कर दिया है।

Join WhatsApp Group Click Here

पिछले दो-तीन दिनों से मौसम में आए बदलाव के कारण खेतों में पकने के लिए लगभग तैयार धान की फसल जमीन पर गिर गई है। कुछ ही दिनों में कटाई शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। खेतों में बिछी फसल और आसमान में छाए बादलों को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।

पहले बाढ़ ने उजाड़ी फसल, अब आंधी-बारिश ने बढ़ाई परेशानी

महानदी में आई भारी बाढ़ के दौरान नदी किनारे बसे कई गांवों में खेतों तक पानी पहुंच गया था। इससे बड़ी मात्रा में धान की फसल खराब हो गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि जो फसल बच गई है, उससे कुछ भरपाई हो सकेगी। लेकिन चक्रवात ‘अर्नव’ के प्रभाव से आई तेज हवाओं और बारिश ने उनकी उम्मीदों को भी झटका दिया है।

धान की फसल इस समय पकने की स्थिति में है। ऐसे में तेज हवा चलने से पौधे जमीन पर गिर गए हैं। खेतों में पानी भरने और फसल के जमीन से सट जाने के कारण कटाई में भी परेशानी हो सकती है। गिरी हुई फसल को संभालना और उसकी कटाई करना किसानों के लिए अतिरिक्त मेहनत और खर्च का कारण बन सकता है। यदि मौसम लंबे समय तक खराब रहता है तो फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

महानदी किनारे के किसानों पर दोहरी मार

इस बार सबसे ज्यादा चिंता महानदी तटवर्ती क्षेत्र के किसानों की है। विजयपुर, बुदबुदा, लिप्ती, पिहरा, नौघटा, छैलफोरा, नदीगांव, परसरामपुर, सुरसी, सूरजगढ़, रानीडीह, कोर्रा, पोरथ, तोरा, ठेंगागुड़ी, बोरिदा और लुकापारा सहित आसपास के गांवों में किसानों को पहले बाढ़ और अब बेमौसम बारिश व तेज हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।

इन गांवों के कई किसानों की फसल पहले ही बाढ़ की चपेट में आ चुकी थी। जो फसल किसी तरह बची हुई थी, वह अब खेतों में गिर गई है। किसानों के लिए यह दोहरी मार जैसी स्थिति है। खेती में बीज, खाद, दवाई, मजदूरी और अन्य जरूरी कामों पर पहले ही काफी पैसा खर्च हो चुका है। ऐसे में कटाई से ठीक पहले फसल गिरने से उनकी आर्थिक चिंता और बढ़ गई है।

कटाई की तैयारी के बीच अब नुकसान का डर

किसानों को उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में धान की कटाई शुरू हो जाएगी और मेहनत का फल घर पहुंचेगा। लेकिन बदले मौसम ने उनकी इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है। खेतों में गिरी फसल को देखकर किसान अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर उनकी उपज कितनी बच पाएगी। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो खेतों में गिरी धान की फसल को और नुकसान हो सकता है।

किसानों के सामने अब सिर्फ फसल गिरने की समस्या नहीं, बल्कि उसकी कटाई, गुणवत्ता और उचित उपज मिलने की चिंता भी खड़ी हो गई है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की वास्तविक स्थिति का आकलन और नुकसान का सर्वे कराया जाना जरूरी है, ताकि प्रभावित किसानों को स्थिति के अनुसार राहत मिल सके।

इस साल पहले महानदी की बाढ़ और अब चक्रवात ‘अर्नव’ के प्रभाव ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक लहलहाती धान की फसल देखकर किसान खुश थे, आज उन्हीं खेतों में गिरी हुई फसल देखकर उनकी चिंता बढ़ गई है। अब किसानों की नजर मौसम के साफ होने और प्रशासन की ओर से संभावित नुकसान के आकलन पर टिकी हुई है।

Scroll to Top