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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया तहसील के ग्राम बोंदा में सरकारी बगई नाले के कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बोंदा-नौघटा मुख्य मार्ग पर जोतपुर के पास प्रस्तावित क्रेशर प्लांट के लिए जमीन समतलीकरण और भराव के दौरान प्राकृतिक नाले के स्वरूप से छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगा है। ग्रामीणों को आशंका है कि नाले का बहाव प्रभावित हुआ तो बरसात में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। मामले में ग्राम बोंदा निवासी नितिन कुमार पाणिग्राही ने कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
मिट्टी-मुरुम डालकर नाला पाटने का आरोप
शिकायत के अनुसार, सारंगढ़ निवासी संतोष अग्रवाल द्वारा प्रस्तावित क्रेशर प्लांट के लिए अपनी निजी जमीन पर समतलीकरण और भराव का काम कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान जमीन से लगे प्राकृतिक बगई नाले के एक छोर पर भारी मात्रा में मिट्टी और मुरुम डालकर उसे पाट दिया गया है। वहीं, नाले के दूसरी ओर बड़ी पुलिया का निर्माण कर उसके प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस काम से नाले का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
बरसात में खेतों और बस्ती में पानी भरने की आशंका
ग्रामीणों के मुताबिक, बगई नाला आसपास के क्षेत्र में पानी निकासी का महत्वपूर्ण प्राकृतिक माध्यम है। यदि इसके बहाव में रुकावट आती है तो बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। इससे निचली बस्ती में जलभराव होने के साथ आसपास के किसानों के खेतों में पानी भरने और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यह नाला कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके प्राकृतिक प्रवाह और स्वरूप को सुरक्षित रखना जरूरी है।
पहले भी सूचना देने का दावा, अब कलेक्टर से जांच की मांग
शिकायतकर्ता और ग्रामीणों के अनुसार, मामले की जानकारी पहले भी स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से सरिया तहसीलदार को दी गई थी। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर जांच करने की मांग की थी, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
अब नितिन कुमार पाणिग्राही ने कलेक्टर से राजस्व, सिंचाई और खनिज विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने नाले का सीमांकन कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कहीं शासकीय भूमि पर अतिक्रमण तो नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में अवैध कब्जे या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और नाले को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और मौके की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। प्रस्तावित क्रेशर संचालक संतोष अग्रवाल और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


