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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जिले के सरिया तहसील क्षेत्र के बोंदा-नौघटा मार्ग पर एक नए क्रशर की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन क्रशर शुरू होने से पहले ही इसे लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्रशर तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए बगई नाले को पाटकर रास्ता तैयार कर दिया गया है। ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे इन आरोपों और पूरे मामले की पड़ताल के लिए मौके पर हमारी टीम भी मंगलवार को पहुंची।

जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो सड़क और क्रशर के लिए तैयार की जा रही निजी जमीन के बीच मौजूद बगई नाले की स्थिति साफ दिखाई दी। एक जगह बड़ी पुलिया डालकर मिट्टी भरी गई है, वहीं उससे लगी दूसरी जगह नाले को पूरी तरह पाट दिया गया है। अब सवाल यह है कि आखिर निजी क्रशर तक पहुंच बनाने के लिए सरकारी नाले की प्राकृतिक संरचना से इस तरह छेड़छाड़ करने की अनुमति किसने दी?

दरअसल, पूरा मामला ग्राम पंचायत बोंदा की सीमा अंतर्गत बोंदा-नौघटा पहुंच मार्ग के किनारे जोतपुर का है। जहां सड़क के दूसरी तरफ बगई नाले से लगी निजी जमीन पर समतलीकरण का काम चल रहा है। यही जमीन प्रस्तावित क्रशर उद्योग के लिए तैयार की जा रही है। लेकिन सड़क और इस जमीन के बीच बगई नाला होने के कारण क्रशर तक पहुंचने के लिए रास्ते की जरूरत थी। मौके पर देखा गया कि इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नाले में मिट्टी डालकर रास्ता बनाया गया है। एक हिस्से में बड़ी पुलिया लगाकर उसके ऊपर मिट्टी डाली गई है, जबकि उससे लगे दूसरे हिस्से में नाले को मिट्टी से पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है। यानी जिस नाले से बारिश का पानी निकलता था, उसी के हिस्से को अब क्रशर तक पहुंचने के रास्ते में बदल दिया गया है।

तीन दशक पुराना नाला, अब रास्ते में तब्दील
मौके से गुजर रहे राहगीरों से जब इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि बगई नाला बारिश के पानी की प्राकृतिक निकासी का जरिया रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन दशक पहले तक यह नाला सक्रिय अवस्था में था और बारिश का पानी इसी रास्ते से निकलता था। ऐसे में नाले को पाटकर रास्ता बनाने से आने वाले समय में पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों को आशंका है कि बारिश के दौरान पानी का प्राकृतिक बहाव रुकने से आसपास के खेतों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। सवाल यह भी है कि अगर क्रशर तक पहुंच बनाने के लिए रास्ता जरूरी था तो नाले की प्राकृतिक संरचना को प्रभावित किए बिना रास्ते की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
सरकारी जमीन पर काम की अनुमति आखिर किसने दी?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी नाले पर किए गए काम को लेकर है। नाले में पुलिया डालकर मिट्टी भरने और एक हिस्से को पूरी तरह पाटने का काम मौके पर दिखाई दे रहा है। लेकिन यह काम किसकी अनुमति से हुआ, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। मौके पर भी किसी विभागीय अनुमति या स्वीकृति से संबंधित कोई सूचना दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर यह शासकीय नाला है तो निजी उद्योग के लिए इसमें पुलिया डालने, मिट्टी भरने और रास्ता बनाने की अनुमति आखिर किस विभाग या अधिकारी ने दी? वहीं यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई है तो सरकारी नाले को पाटकर रास्ता बनाने की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं रोकी गई?
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले का स्थल निरीक्षण कराने, नाले और जमीन के दस्तावेजों की जांच करने तथा निर्माण कार्य की अनुमति से जुड़े दस्तावेज सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पहले चक्काजाम, अब क्रशर के रास्ते के लिए नाला पाटा
बोंदा-नौघटा क्षेत्र में यह पहली बार नहीं है जब क्रशर और भारी वाहनों को लेकर ग्रामीणों की परेशानी सामने आई हो। भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर नौघटा के ग्रामीण पहले भी चक्काजाम कर विरोध जता चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पहले से ही क्रशरों की धूल, धुएं और भारी वाहनों की मार झेल रहा है।
अब पुरानी समस्याओं का समाधान किए बिना नए क्रशर के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। वह भी ऐसे स्थान पर जहां सड़क और क्रशर की जमीन के बीच बगई नाला मौजूद है। ग्रामीणों का कहना है कि क्रशर का रास्ता बनाने के लिए नाले की प्राकृतिक संरचना को ही बदल दिया गया है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन अगर समय रहते मौके का निरीक्षण कर कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि प्रशासन की चुप्पी से निजी उद्योग को बढ़ावा मिलने का संदेश जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की जांच की जाए और यदि नियमों के विपरीत काम पाया जाता है तो उसे रुकवाया जाए।
क्रशर की एनओसी को लेकर भी असमंजस, पंचायत के बयानों में विरोधाभास
मामला सिर्फ नाले को पाटकर रास्ता बनाने तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित क्रशर प्लांट की एनओसी को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। चूंकि क्रशर के लिए चिन्हित जमीन बगई नाले के उस पार है, इसलिए वहां तक पहुंच मार्ग की व्यवस्था और उसकी अनुमति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। सड़क से नाला लगा हुआ है और उसके दूसरी तरफ क्रशर की जमीन है, तो वहां तक पहुंचने के लिए नाले में रास्ता किस आधार पर बनाया गया, यह भी जांच का विषय है।
इसी सिलसिले में हमारी टीम ने ग्राम पंचायत बोंदा के वर्तमान सरपंच गोबर्धन निषाद से संपर्क कर क्रशर से संबंधित जानकारी लेनी चाही। उन्होंने बताया कि क्रशर के संचालन के लिए पूर्व सरपंच द्वारा एनओसी जारी की गई थी और उनके द्वारा उसका नवीनीकरण किया गया है। लेकिन नाले को पाटकर सड़क बनाने के मामले में पंचायत की ओर से किसी प्रकार की अनुमति दिए जाने या प्रशासन की ओर से कोई अनुमति लिए जाने की बात को उन्होंने खारिज किया।
इसके बाद पूर्व सरपंच सीता सिदार के प्रतिनिधि सुरेंद्र सिदार से संपर्क किया गया। उनके द्वारा अपने कार्यकाल में एनओसी दिए जाने की बात को एक लाइन से खारिज करते हुए वर्तमान सरपंच द्वारा एनओसी जारी किए जाने की बात कही गई। यानी क्रशर की एनओसी किसके कार्यकाल में जारी हुई, उसका नवीनीकरण किस आधार पर हुआ और नाले को पाटकर बनाए गए पहुंच मार्ग की अनुमति किसने दी, इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं। पंचायत के वर्तमान और पूर्व प्रतिनिधि के बयानों में अंतर होने के कारण मामला और उलझ गया है।
नया क्रशर, पुरानी मुसीबत और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
बोंदा-नौघटा में प्रस्तावित नया क्रशर अभी शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही पहुंच मार्ग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र पहले से ही क्रशरों की धूल, धुएं और भारी वाहनों की परेशानी से जूझ रहा है। ऐसे में निजी क्रशर तक पहुंच बनाने के लिए बगई नाले को पाटकर रास्ता तैयार कर दिया जाना ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि क्रशर कहां लगेगा, बल्कि सवाल यह है कि क्या किसी निजी उद्योग की सुविधा के लिए सरकारी नाले को रास्ते में बदला जा सकता है? नाले में पुलिया और मिट्टी भरने की अनुमति किसने दी? क्रशर की एनओसी किसके द्वारा जारी की गई? और अगर नाले को पाटने की अनुमति नहीं थी तो मौके पर यह काम कैसे हो गया?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, स्थल निरीक्षण, जमीन और नाले के सीमांकन के साथ क्रशर की एनओसी और पहुंच मार्ग से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच की मांग की है। अब देखना यह है कि इन सवालों पर प्रशासन मौके पर पहुंचकर जांच करता है या फिर बोंदा-नौघटा का बगई नाला निजी क्रशर तक पहुंचने का रास्ता बनकर ही रह जाएगा।




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