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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया के रामचंडी मंदिर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन निकली कलश यात्रा के दौरान एक तेज रफ्तार बुलेट बाइक की टक्कर से तीन स्कूली बच्चे घायल हो गए। घटना रविवार दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, बिना नंबर प्लेट की बुलेट पर दो से तीन लोग सवार थे। भीड़भाड़ के बीच बाइक चालक नियंत्रण खो बैठा और सड़क किनारे खड़ी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस घटना में सुरसी निवासी शंकर साहू, छोटे नवापारा निवासी लोकेश नायक और सुरसी निवासी प्रीतम देहरी घायल हो गए। शंकर के पैर की हड्डी टूटने की बात सामने आई है, जबकि अन्य दोनों बच्चों को भी चोटें आईं।
एक बच्चा बुरला मेडिकल कॉलेज में भर्ती, परिवार पर इलाज का बोझ
घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद प्रीतम देहरी को छुट्टी दे दी गई, जबकि शंकर साहू और लोकेश को आगे के इलाज के लिए रायगढ़ रेफर किया गया। परिजन दोनों बच्चों को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज पहुंचे जहां रविवार होने और एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं होने की वजह से उनको आरएल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
परिजनों के अनुसार, लोकेश के पैर में 5-7 टांके लगाए गए और बाद में उसे छुट्टी दे दी गई। वहीं, शंकर के पैर की हड्डी गंभीर रूप से टूटने के कारण डॉक्टरों ने उसे बुरला मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। फिलहाल शंकर अपने परिजनों के साथ बुरला मेडिकल कॉलेज, ओडिशा में भर्ती है। बताया जा रहा है कि उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और इलाज का खर्च उठाने में परेशानी का सामना कर रहा है।
इलाज का खर्च उठाने की बात कही, अब जिम्मेदारी से पीछे हटने का आरोप
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच बाइक चालक को लेकर विवाद की स्थिति बनी। जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना करने वाला चालक मौके से फरार हो गया। इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति के बाइक चलाने की बात सामने आई, जिसे लोगों ने पकड़ लिया और थाने ले जाने की चर्चा हुई।
लोकेश बारीक के मामा उमाशंकर ने बताया कि इसी बीच बिलाईगढ़ ‘अ’ के आकाश मेलोडी के संचालक भूषण पटेल ने बीच-बचाव किया और एफआईआर दर्ज नहीं कराने की बात कहते हुए घायल बच्चों के इलाज का खर्च उठाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। इस बीच भूषण पटेल और मौजूद भीड़ के बीच काफी बहसबाजी के साथ माहौल गंभीर हो गया था।
लेकिन जब घायल बच्चों के परिजनों ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगी, तो कथित तौर पर भूषण पटेल ने यह कहते हुए खर्च देने से इनकार कर दिया कि उन्होंने सरकारी अस्पताल के इलाज का खर्च उठाने की बात कही थी, निजी अस्पताल का नहीं। इस घटनाक्रम को लेकर परिजनों में नाराजगी है। हालांकि, दुर्घटना की जिम्मेदारी, बाइक चालक की पहचान और इलाज के खर्च को लेकर हुए समझौते को लेकर तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है।
मंदिर और थाना परिसर के सामने हादसा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने कलश यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरिया का रामचंडी मंदिर थाना परिसर के सामने स्थित है और यात्रा के दौरान पुलिस जवानों की ड्यूटी भी लगी थी। इसके बावजूद भीड़ के बीच तेज रफ्तार बाइक चलने और कथित तौर पर गलत दिशा में वाहन आने से तीन बच्चे घायल हो गए।
सवाल यह है कि जब धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में लोग और बच्चे मौजूद थे, तब वाहनों की आवाजाही पर पर्याप्त नियंत्रण क्यों नहीं रहा? ऐसे आयोजनों में बैरिकेडिंग, वाहन गति पर नियंत्रण और सुरक्षित पैदल मार्ग जैसी व्यवस्थाएं बेहद जरूरी हैं।
गरीब परिवार के सामने इलाज की चिंता, समाज की बैठक पर नजर
जानकारी के अनुसार, गंभीर रूप से घायल शंकर साहू का परिवार इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ है। इस स्थिति को देखते हुए कोलता समाज के लोगों की बैठक बुलाकर घायल बच्चे के परिजनों और भूषण पटेल की मौजूदगी में मामले पर चर्चा कर समाधान निकालने की बात कही जा रही है। फिलहाल परिवार सामाजिक बैठक के फैसले का इंतजार कर रहा है।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल बच्चे के इलाज और दुर्घटना की जवाबदेही का है। यदि किसी ने मदद का भरोसा दिया था, तो उस पर स्पष्टता जरूरी है। वहीं, दुर्घटना के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज हुई है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी सामने आना भी जरूरी है।
धार्मिक आयोजन के बीच तीन बच्चों का घायल होना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर यातायात सुरक्षा की गंभीर याद दिलाता है। अब जरूरत है कि घायल बच्चे को बेहतर इलाज मिले, घटना की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि किसी गरीब परिवार को अपने बच्चे के इलाज के लिए दर-दर भटकना न पड़े।


