मुंगेली जनसंपर्क अधिकारी विवाद : रायपुर में समाप्त हुआ पत्रकार का एकल अनशन, अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामूहिक सत्याग्रह की तैयारी..

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रायपुर// मुंगेली जिले में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन सहायक संचालक एवं जनसंपर्क अधिकारी पर लगे कथित वित्तीय कदाचार तथा मीडिया प्रतिनिधियों पर अशोभनीय टिप्पणियों के आरोपों को लेकर जारी गतिरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने की ओर अग्रसर है। नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर बीते दिनों से एकल अनशन पर बैठे पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी का अनशन मुंगेली से पहुंचे तीन दर्जन से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने धरना स्थल पर उपस्थित होकर समाप्त करवा दिया है। हालांकि, पत्रकारों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि इसे अधिक व्यापक और सामूहिक स्वरूप देने की रणनीति का हिस्सा है।

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सामूहिक स्तर पर दिल्ली में सत्याग्रह की रूपरेखा

धरना स्थल पर जुटे मीडिया प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनदर्शन, जिला प्रशासन तथा महामहिम राज्यपाल तक विधिवत ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद विहित अवधि में कोई ठोस व पारदर्शी जांच शुरू नहीं की गई। पत्रकारों ने प्रशासनिक उदासीनता पर क्षोभ व्यक्त करते हुए निर्णय लिया है कि अब इस संवैधानिक लड़ाई को देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। संघ से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि वे राष्ट्रपति महोदय से मिलकर चौथे स्तंभ की गरिमा, प्रशासनिक शुचिता और प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे और न्याय मिलने तक यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

प्रकरण के अनुसार, मुंगेली जिले के मीडिया प्रतिनिधियों ने पूर्व में जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल महोदय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में आरोप लगाया गया था कि मुंगेली में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी द्वारा शासकीय विज्ञापनों एवं आयोजनों के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताएं की गईं। इसके अतिरिक्त, स्थानांतरणोपरांत एक कथित ऑडियो में जिले के पत्रकारों के विरुद्ध अमर्यादित व मानहानिकारक टिप्पणियों के प्रयोग का भी आरोप है। इन विषयों पर सीएम हेल्पलाइन और पीएम-पीजी पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। तय समय-सीमा में जांच प्रक्रिया आगे न बढ़ने से क्षुब्ध होकर खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने तूता में एकल अनशन शुरू किया था।

विधिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जब भी किसी शासकीय अधिकारी पर सेवा आचरण संहिता के उल्लंघन या वित्तीय विसंगतियों के आरोप लगते हैं, तो समयबद्ध प्राथमिक जांच स्थापित करना प्रशासनिक विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। मुंगेली के पत्रकारों का मत है कि राज्य स्तर पर संज्ञान में विलंब होने के कारण अब उन्हें केंद्र और संवैधानिक प्रमुख के समक्ष अपनी बात रखने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

स्थानीय अनशन को समाप्त कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों की संख्या में सत्याग्रह करने की यह योजना इस आंदोलन के दूसरे चरण को रेखांकित करती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन-प्रशासन इस सामूहिक रणनीति और दिल्ली कूच की घोषणा के बीच क्या रुख अपनाता है।

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