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बिलासपुर// छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित होने के बाद अभ्यर्थियों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। रविवार को बिलासपुर के गांधी चौक में संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले अभ्यर्थियों ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में मोमबत्तियां लेकर पहुंचे युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा से ठीक दो दिन पहले स्थगन और आरक्षण रोस्टर से जुड़े विवाद पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार विवाद का जल्द समाधान करे, नई परीक्षा तिथि घोषित करे और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करे।

दो-दो साल नहीं, कई युवा चार-पांच साल से कर रहे तैयारी
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले दो से पांच साल या उससे भी लंबे समय से शिक्षक भर्ती और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। कई युवा दूसरे जिलों से बिलासपुर आकर किराए के कमरों में रह रहे हैं और लाइब्रेरी में घंटों पढ़ाई कर रहे हैं। रहने, खाने, किराए और पढ़ाई का खर्च उठाते हुए नौकरी की उम्मीद में तैयारी करना उनके लिए पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में परीक्षा स्थगित होने से उनकी मेहनत, समय और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद जब परीक्षा की तारीख तय हुई और एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए गए, तब अंतिम समय में परीक्षा टलने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा। युवाओं को अब यह चिंता सता रही है कि परीक्षा दोबारा कब होगी और भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा। उनका कहना है कि सरकार को भर्ती से जुड़े नियमों और विवादों को पहले ही स्पष्ट कर लेना चाहिए था, ताकि परीक्षा के ठीक पहले ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थगित हुई परीक्षा
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित होनी थी, जबकि शिक्षक भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 के लिए प्रस्तावित थी। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े विवाद के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने परीक्षा पर रोक लगा दी। यह विवाद भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण और विशेष रूप से पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिए जाने से संबंधित है। अदालत के आदेश के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से महज दो दिन पहले स्थगन की जानकारी सामने आने से उनकी तैयारियों और योजनाओं पर असर पड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले आरक्षण रोस्टर और नियमों की पूरी जांच क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि भर्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता होनी चाहिए, ताकि युवाओं को बार-बार अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
इम्तियाज ने उठाया भर्ती में देरी का सवाल
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी इम्तियाज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती लंबे अंतराल के बाद आती है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले आरक्षण रोस्टर और दूसरे नियमों की जांच करना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और आयोग की होती है, तो कमियों को पहले ही दूर क्यों नहीं किया जाता।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती और परीक्षाओं से जुड़े विवाद बार-बार सामने आने से युवाओं को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों की समस्याओं का समय रहते समाधान करने की मांग की।
57 हजार पदों की चर्चा से 5 हजार तक पहुंचने का दावा
अभ्यर्थी प्रकाश वर्मा ने भर्ती को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के बीच शुरुआत में 57 हजार पदों पर भर्ती की चर्चा हुई थी। इसके बाद 33 हजार और 16 हजार पदों को लेकर उम्मीदें बनीं, लेकिन अब भर्ती करीब 5 हजार पदों तक सिमटती दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रकाश वर्मा ने कहा कि एडमिट कार्ड जारी होने के बाद अंतिम समय में परीक्षा स्थगित होने से अभ्यर्थियों की परेशानी और बढ़ गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि भर्ती में पदों की संख्या और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि युवाओं को अपने भविष्य की योजना बनाने में आसानी हो सके। पदों की संख्या को लेकर ये आंकड़े अभ्यर्थी की ओर से किए गए दावे हैं।
पुराना प्रश्नपत्र सार्वजनिक कर नष्ट करने की मांग
कैंडल मार्च के दौरान प्रकाश वर्मा समेत कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा के लिए तैयार किए गए पुराने प्रश्नपत्र को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि प्रश्नपत्र पहले से तैयार हो चुके हैं, ऐसे में उनकी गोपनीयता को लेकर आशंका बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पुराने प्रश्नपत्र को सार्वजनिक कर नष्ट किया जाए और अगली परीक्षा नए प्रश्नपत्र के साथ आयोजित की जाए।
महिला अभ्यर्थियों ने भी कहा कि अगली परीक्षा के समय प्रश्नपत्र की गोपनीयता को लेकर कोई नया विवाद नहीं होना चाहिए। हालांकि, यह अभ्यर्थियों की ओर से जताई गई आशंका और मांग है। प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि इन बयानों से नहीं होती।
अजय साहू बोले, परीक्षा दिसंबर से पहले नहीं हुई तो बढ़ेगा इंतजार
अभ्यर्थी अजय साहू ने बताया कि वे पिछले चार-पांच साल से पीएससी की तैयारी कर रहे हैं और शिक्षक भर्ती की तैयारी भी कर रहे थे। परीक्षा स्थगित होने से उनकी आगे की योजना प्रभावित हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि दिसंबर 2026 से पहले परीक्षा आयोजित नहीं होती है, तो अभ्यर्थियों को और लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
अजय साहू ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों में भर्ती के लिए हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को भी पात्रता देने की मांग उठाई। उनका कहना है कि भर्ती के नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भर्ती से जुड़े फैसलों में स्पष्टता रहने से युवाओं को समय और संसाधनों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
परिवार से दूर रहकर तैयारी कर रहीं महिला अभ्यर्थी भी परेशान
कैंडल मार्च में शामिल महिला अभ्यर्थी सीता साहू ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि परीक्षा स्थगित होने की खबर से वे मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थीं। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो से तीन साल से तैयारी कर रही हैं और परिवार, ससुराल तथा पति से दूर रहकर बिलासपुर में पढ़ाई कर रही हैं। पिछले आठ महीने से किराए पर रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहीं सीता साहू के अनुसार, अब परिवार की ओर से घर लौटने का दबाव भी बढ़ने लगा है।
सीता साहू ने कहा कि रहने, खाने और पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। नौकरी नहीं लगने और परीक्षा लगातार टलने की स्थिति में आगे क्या करना है, यह समझ नहीं आ रहा। उनके मुताबिक, परिवार से दूर रहकर तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा स्थगित होने का असर सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों पर भी पड़ता है।
अभ्यर्थी किरण मौर्या ने भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को परिवार से दूर रहना पड़ता है। किराया, भोजन और पढ़ाई पर लगातार खर्च होता है। कई अभ्यर्थी अपनी नींद और आराम तक छोड़कर तैयारी करते हैं। ऐसे में लंबे इंतजार के बाद परीक्षा स्थगित होने से नाराजगी होना स्वाभाविक है।
शैलजा साहू और मनीष कुमार ने जल्द फैसले की मांग की
अभ्यर्थी शैलजा साहू ने कहा कि शिक्षक भर्ती कई सालों बाद आती है, इसलिए सरकार को इससे जुड़े विवाद का जल्द समाधान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो साल से तैयारी कर रही हैं और उनके परिवार को भी उनसे काफी उम्मीदें हैं। परीक्षा स्थगित होने से अभ्यर्थियों के साथ उनके परिवार भी निराश हुए हैं।
वहीं, अभ्यर्थी मनीष कुमार ने कहा कि आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण परीक्षा पर रोक लगी है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से समय रहते इस मामले का समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते परीक्षा स्थगित करने की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि संबंधित पक्षों के बीच विवाद का समाधान कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
अब नई परीक्षा तारीख का इंतजार, सरकार से स्पष्ट जवाब चाहते हैं युवा
बिलासपुर के गांधी चौक में निकाले गए कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने अपनी परेशानियां सामने रखते हुए भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता और समयबद्ध कार्यक्रम की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को यह पता होना चाहिए कि परीक्षा कब होगी और भर्ती की आगे की प्रक्रिया क्या रहेगी।
फिलहाल परीक्षा स्थगित होने के बाद अभ्यर्थियों की निगाहें विवाद के समाधान, सरकार के अगले कदम और नई परीक्षा तिथि की घोषणा पर टिकी हैं। युवाओं की मांग है कि आरक्षण संबंधी विवाद का जल्द निपटारा किया जाए, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और भविष्य में परीक्षा से ठीक पहले इस तरह की अनिश्चितता की स्थिति पैदा न हो।



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