उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 352 केंद्रों में हुई बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान परीक्षा, 1736 महिलाओं और 349 पुरुषों ने दी परीक्षा..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// शिक्षा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती, इस संदेश को सार्थक करते हुए सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 27 सितंबर को उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान की राज्यव्यापी महापरीक्षा का आयोजन किया गया। जिले में आयोजित इस महापरीक्षा में नवसाक्षरों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ सहभागिता कर यह संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

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कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषिकेश तिवारी के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा परीक्षा के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए जिले में 352 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों में कुल 2085 शिक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इनमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कुल 1736 महिलाओं ने परीक्षा देकर साक्षरता की दिशा में अपनी रुचि और प्रतिबद्धता दिखाई, जबकि 349 पुरुष शिक्षार्थी भी परीक्षा में शामिल हुए।

उम्र की सीमाओं को पीछे छोड़ साक्षरता की ओर बढ़े कदम

महापरीक्षा के दौरान बरमकेला, सारंगढ़ और बिलाईगढ़ विकासखंडों में नवसाक्षरों का उत्साह देखने को मिला। उम्र की सीमाओं को पीछे छोड़कर शिक्षार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। विशेष रूप से 60 वर्ष की आयु के आसपास और उससे अधिक उम्र के शिक्षार्थियों की सहभागिता ने साक्षरता अभियान के उद्देश्य को और सार्थक बनाया। उनके लिए यह परीक्षा केवल पढ़ने-लिखने और संख्यात्मक ज्ञान को परखने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का माध्यम भी बनी।

परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए विकासखंड एवं पंचायत स्तर पर सतत निगरानी और निरीक्षण की व्यवस्था की गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी एल.एन. पटेल एवं जिला नोडल अधिकारी रामेश्वर प्रसाद जांगड़े ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। परीक्षा के आयोजन में ग्राम प्रभारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित यह महापरीक्षा जिले में साक्षरता के प्रति जनभागीदारी और उत्साह का जीवंत उदाहरण बनी। बड़ी संख्या में नवसाक्षरों, विशेषकर महिलाओं की सहभागिता ने यह साबित किया कि सीखने की ललक उम्र की सीमा से परे होती है और सामूहिक प्रयासों से समाज में शिक्षा की नई रोशनी पहुंचाई जा सकती है।

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