वित्त मंत्री ओपी चौधरी स्वयं नाव में सवार होकर पहुंचे जलमग्न गांवों तक, कहा – छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकार के समन्वय से जलप्रवाह प्रबंधन में तेजी, महानदी का बाढ़ अब नियंत्रण में..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// महानदी में बढ़े जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बीच प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने सोमवार को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के महानदी तटवर्ती सरिया तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। उन्होंने राहत शिविरों का निरीक्षण करने के साथ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत एवं बचाव कार्यों की जमीनी स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों, किसानों, माताओं, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।

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वित्तमंत्री चौधरी ने सबसे पहले सरिया स्थित कन्या शाला में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में रह रहे प्रभावित ग्रामीणों से चर्चा कर उनके रहने, भोजन, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने बाढ़ से उत्पन्न परेशानियों के साथ आवास की जरूरत भी उनके सामने रखी। वित्त मंत्री ने अधिकारियों को राहत शिविर में रह रहे लोगों के लिए पर्याप्त भोजन, स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों के रहने की समुचित व्यवस्था तथा आवास से संबंधित आवश्यकताओं पर भी अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

राहत शिविर के निरीक्षण के बाद वित्त मंत्री चौधरी ग्राम बोरिदा पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद वे राहत एवं बचाव दल के साथ नाव में सवार होकर जलमग्न ग्राम ठेंगागुड़ी पहुंचे। जलभराव के बीच मौके पर पहुंचकर उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की और गांव की स्थिति, लोगों के सुरक्षित रहने तथा राहत व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उनके साथ राहत एवं बचाव दल की टीमें भी मौजूद रहीं। इसके बाद उन्होंने ग्राम तोरा पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया और बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति का निरीक्षण किया।

दौरे के दौरान वित्त मंत्री ने प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कहते हुए अधिकारियों से कहा कि जिन लोगों को राहत शिविरों अथवा सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है, वहां उनके दैनिक जीवन से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य जांच, पेयजल, भोजन और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। प्रभावित परिवारों की आवास संबंधी जरूरतों को भी गंभीरता से लेते हुए आवश्यक पहल करने को कहा गया।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकार के समन्वय हीराकुंड से जलप्रवाह प्रबंधन में तेजी, महानदी का बाढ़ अब नियंत्रण में

मीडिया से चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से लगे तटीय क्षेत्रों तथा छत्तीसगढ़ के बस्तर, धमतरी, रायपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती और रायगढ़ जिले के पुसौर क्षेत्र में लगातार दो-तीन दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण महानदी के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी। बांधों में पहले से पानी भरा होने के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री के स्तर पर आपसी समन्वय के साथ आवश्यक कदम उठाए गए। हीराकुंड जलाशय से बढ़े जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए पहले 20 गेट खोले गए और बाद में 8 अतिरिक्त गेट खोले जाने से कुल 28 गेटों से जल निकासी की जा रही है। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार 19 गेट बाईं ओर और 9 गेट दाईं ओर खुले हैं।

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि हीराकुंड से जलप्रवाह के नियंत्रित संचालन तथा दोनों राज्यों के बीच समन्वय से महानदी के जलस्तर में कमी आने लगी है और स्थिति नियंत्रण की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पुसौर तहसील के ठेंगागुड़ी, तोरा और सुरजगढ़ जैसे प्रभावित गांवों में एसडीएम सहित पूरा प्रशासनिक अमला मैदानी स्तर पर सक्रिय है। राहत शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को सहायता दी जा रही है तथा चिकित्सा शिविर, पेयजल, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बाढ़ प्रभावित गावों में राहत शिविर और बचाव कार्य तेजी से जारी

पिछले दिनों से हुई मूसलाधार बारिश और गंगरेल 14 गेट खोलने के बाद महानदी में बढ़े जलस्तर के कारण कई तटवर्ती गांवों में जलभराव की स्थिति बनी है। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों, शासकीय चौपालों, ऊंचे स्थानों तथा रिश्तेदारों और परिचितों के घरों में सुरक्षित पहुंचाया गया है। गांवों में मुनादी कराकर लोगों को जलमग्न क्षेत्रों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की समझाइश दी जा रही है।

कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया गया है। उनके निर्देश पर एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और ग्राम कोटवार सहित मैदानी अमला प्रभावित गांवों में लगातार सक्रिय है। राहत एवं बचाव कार्यों में एसडीआरएफ और नगर सेना की टीमें तैनात हैं तथा स्वास्थ्य विभाग का अमला भी प्रभावित क्षेत्रों में सेवाएं दे रहा है।

ग्राम पोरथ में बस्ती के भीतर करीब 4 से 5 फीट पानी बह रहा है और मंदिर के पास चार घरों में पानी प्रवेश कर चुका है। रानीडीह में चार घर प्रभावित हुए हैं और करीब 30 लोगों को शासकीय चौपाल में सुरक्षित रखा गया है, जहां पंचायत द्वारा भोजन की व्यवस्था की जा रही है। तोरा में ढलान वाले क्षेत्र में करीब तीन फीट पानी जमा है तथा दो घर प्रभावित हुए हैं। यहां करीब 20 से 25 लोग सुरक्षित हैं।

रेबो में सभी 11 मकानों में पानी भर गया है। ग्रामीणों को ऊंचे स्थान पर सुरक्षित रखा गया है और मवेशियों को भी सुरक्षित स्थल पर पहुंचाया गया है। ठेंगागुड़ी में 10 से 12 मकान प्रभावित हुए हैं और गांव का रास्ता बंद है। यहां के करीब 40 लोग लुकापारा राहत केंद्र में सुरक्षित हैं। बोरीदा में सांकरा-बोरीदा मुख्य मार्ग पर पानी भरा हुआ है और एसडीआरएफ की टीम तैनात है। ठेंगागुड़ी और बोरीदा क्षेत्र के करीब 60 लोग सरिया के राहत शिविर में सुरक्षित हैं।

छूहीपाली में मुख्य मार्ग एवं खेतों में पानी भरा है। परसरामपुर में करीब 40 परिवारों के घरों में पानी पहुंचा है और सभी पड़ोसियों के घरों में सुरक्षित हैं। नदीगांव में करीब 20 परिवार प्रभावित हुए हैं और लगभग 50 से 60 लोग सुरक्षित स्थानों पर हैं। लिप्ती और विजयपुर में 10-10 घर प्रभावित हुए हैं तथा मुख्य मार्ग भी जलभराव से प्रभावित हैं। नवापारा छोटे में गलियों में पानी भरने से पहुंच मार्ग प्रभावित है।

पिहरा में करीब 20 घरों में पानी प्रवेश कर गया है और प्रभावित ग्रामीणों को सार्वजनिक चौपाल में सुरक्षित रखा गया है। बुदबुदा में स्कूल में पानी प्रवेश कर चुका है तथा गांव का रास्ता प्रभावित है। सूरसी में मुख्य मार्ग पर करीब 2 से 3 फीट पानी है और लगभग पांच घर प्रभावित हैं। सुरजगढ़ में मुख्य मार्ग पर 2 से 3 फीट पानी है तथा करीब 20 घर प्रभावित हुए हैं। छैलफोरा में मुख्य मार्ग अवरुद्ध है और तीन से चार घर प्रभावित हैं। नवघटा के मंझवारपारा में 10 से 12 घर प्रभावित हैं और परिवार सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।

एडीएम उमेश साहू ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित गांवों की ग्रामवार स्थिति तैयार की गई है और मैदानी अमला लगातार निगरानी कर रहा है। राहत शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य एवं अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। एसडीआरएफ और नगर सेना की टीमें राहत एवं बचाव के लिए तैनात हैं तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई जारी है।

जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे बाढ़ के पानी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। जलमग्न मार्गों से आवागमन न करें तथा प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए दी जा रही समझाइश का पालन करें। आपात स्थिति में जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष के दूरभाष क्रमांक 07788-299016 पर संपर्क किया जा सकता है।

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