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रायगढ़// महतारी वंदन योजना में रायगढ़ जिले में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। योजना का लाभ लेने वाली 1017 महिलाएं अपात्र पाई गई हैं। इन हितग्राहियों को अब तक मिली राशि की वसूली की तैयारी की जा रही है। अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 3 करोड़ रुपए की राशि वापस वसूलनी पड़ सकती है। फिलहाल महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपात्र हितग्राहियों का भुगतान होल्ड कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक महतारी वंदन योजना के तहत केवल पात्र विवाहित, विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को ही लाभ दिया जाना है। योजना शुरू होने के समय आवेदन के साथ महिलाओं से स्वघोषणा पत्र लिया गया था। लेकिन आवेदन में दी गई जानकारी का पर्याप्त स्तर पर सत्यापन नहीं किया गया। आवेदन जमा होने के बाद कई महिलाओं को पात्र मानकर भुगतान शुरू कर दिया गया।
ई-केवायसी के बाद सामने आई गड़बड़ी
करीब दो साल बाद जब हितग्राहियों की ई-केवायसी कराने की प्रक्रिया शुरू हुई तो योजना में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आने लगीं। जांच में कुछ ऐसी युवतियां भी सामने आईं, जो योजना की पात्रता के दायरे में नहीं आती थीं, इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ मिलता रहा।
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2024 में रायगढ़ जिले में 3 लाख 6 हजार 758 महिलाओं को 27 करोड़ 93 लाख 18 हजार 250 रुपए का भुगतान किया गया था। अब जांच के दौरान जिले में 1017 हितग्राही अपात्र पाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर रामभांठा क्षेत्र की एक युवती ने योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन आवेदन के समय उसकी उम्र 21 वर्ष से कम बताई जा रही है। इसी तरह प्राची विहार क्षेत्र में भी एक ऐसी युवती का मामला सामने आया है, जिसकी जन्मतिथि 2007 दर्ज है। इसके बावजूद उसका नाम पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल होकर भुगतान भी होता रहा।
अब राशि की वसूली बनी चुनौती
अपात्र हितग्राहियों को कई महीनों तक योजना की राशि मिलती रही। एक अपात्र हितग्राही को करीब 30 हजार रुपए तक का भुगतान होने की बात सामने आई है। इसी आधार पर 1017 अपात्र हितग्राहियों से करीब तीन करोड़ रुपए की वसूली का अनुमान लगाया जा रहा है। अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपात्र हितग्राहियों से भुगतान की गई राशि वापस लेना है। विभाग की ओर से ऐसे हितग्राहियों का भुगतान रोक दिया गया है और आगे की प्रक्रिया के तहत राशि वसूलने की तैयारी की जा रही है।
बिना पर्याप्त सत्यापन के शुरू हुई योजना पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने महतारी वंदन योजना के शुरुआती सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। योजना को जल्द लागू करने के दौरान आवेदन में दी गई जानकारी के सत्यापन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से अपात्र लोगों तक भी योजना का लाभ पहुंचने की बात सामने आ रही है। अब ई-केवायसी और जांच के बाद अपात्र हितग्राहियों की पहचान हो रही है। ऐसे में सवाल यह है कि अगर शुरुआत में ही दस्तावेजों और पात्रता का सही तरीके से सत्यापन किया जाता तो सरकारी राशि के गलत भुगतान को रोका जा सकता था।


