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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत सरिया तहसील में बोंदा और कटंगपाली गांव की कोटवार नियुक्ति का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कोटवारी भूमि पर अवैध खनन के आरोपों के चलते दोनों गांवों के कोटवारों को पद से बर्खास्त किए जाने के बाद अब नए कोटवारों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, कटंगपाली गांव की कोटवारी भूमि पर पूर्व कोटवार गोविन्द राम चौहान द्वारा अवैध खनन कर खदान/गढढ़ा बनाने की शिकायत के बाद तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए गए जांच में कोटवारी भूमि पर खनन होने और बड़े गड्ढे पाए जाने की पुष्टि हुई। इसके आधार पर भू-राजस्व संहिता की धारा 230 के तहत संबंधित कोटवार को पद से बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के बाद संबंधित कोटवार ने अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष तहसीलदार के आदेश के विरुद्ध अपील प्रस्तुत की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी प्रकार बोंदा गांव में भी कोटवारी भूमि पर पूर्व कोटवार बेलाल कुर्रे द्वारा अवैध खनन की शिकायत मिलने पर जांच उपरांत संबंधित कोटवार के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसे पद से हटा दिया गया।
नए कोटवार की नियुक्ति पर उठे सवाल
दोनों गांवों में नए कोटवारों की नियुक्ति के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कटंगपाली के पूर्व कोटवार गोविंद चौहान ने नए कोटवार की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि फ्लाई ऐश पटवाने से मना करने के कारण उन्हें पद से हटाया गया तथा नियमों की अनदेखी करते हुए उनकी पुत्री को प्राथमिकता नहीं दी गई और किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई। वहीं बोंदा गांव में भी नियुक्ति नए कोटवार को कुछ लोगों द्वारा नियुक्त व्यक्ति को बाहरी बताया जा रहा है।
क्या कहते हैं नियम?
मिली जानकारी के अनुसार, भू-राजस्व संहिता की धारा 230 के नियम (2) में बर्खास्त किए गए कोटवार के पारिवारिक सदस्यों को नियुक्ति नहीं दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। ऐसे अभ्यर्थी अपात्र होते है।
पूर्व नियुक्तियों पर भी उठ रहे सवाल
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोंदा के बर्खास्त कोटवार बेलाल (बेलाल) कुर्रे मूल रूप से रैनभाठा, पुसौर के निवासी बताए जा रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि उन्होंने स्वयं को डॉक्टर के पूर्वजों की वंशावली से संबंधित बताते हुए कोटवार पद की नियुक्ति प्राप्त की थी। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा किया जाना शेष है।
इसी प्रकार कटंगपाली के मामले में भी यह तथ्य सामने आया है कि गोविंदराम चौहान के पिता सेवकराम चौहान को वर्ष 2015 में कोटवारी भूमि पर अवैध खनन में संलिप्त पाए जाने के बाद तत्कालीन तहसीलदार बरमकेला द्वारा पद से बर्खास्त किया जा चुका था। इसके बाद गोविंदराम चौहान की नियुक्ति ( वर्ष-2021)को लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
तहसीलदार सरिया कोमल प्रसाद साहू ने कोटवार नियुक्ति विवाद पर बोले- नियुक्ति पूरी तरह नियमानुसार
बोंदा और कटंगपाली के कोटवार नियुक्ति को लेकर तहसीलदार सरिया कोमल प्रसाद साहू ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि दोनों पूर्व कोटवारों को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत कदाचरण के कारण पदच्युत (बर्खास्त) किया गया था। तहसीलदार के अनुसार, ग्राम कटंगपाली के पूर्व कोटवार गोविंद राम चौहान तथा ग्राम बोंदा के पूर्व कोटवार बेलाल कुर्रे ने शासकीय सेवा भूमि (कोटवारी भूमि) का अवैध उत्खनन के लिए उपयोग किया था, जिससे शासकीय भूमि पर खदान एवं गड्ढे निर्मित हो गए थे। जांच उपरांत दोनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से बर्खास्त किया गया।
उन्होंने बताया कि ग्राम कटंगपाली के पदच्युत कोटवार गोविंद राम चौहान के पिता सेवक राम चौहान को भी वर्ष 2015 में कोटवारी भूमि पर अवैध पत्थर खनन के कारण बर्खास्त किया जा चुका है। तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने कहा कि कोटवार नियुक्ति के नियमों में किसी भी कदाचार के कारण बर्खास्त अथवा पदच्युत कोटवार या उनके परिजनों को नियुक्ति में प्राथमिकता देने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे आवेदक नियुक्ति के लिए अपात्र माने जाते हैं। इसी कारण दोनों पूर्व कोटवारों की संतानों को कोटवारी नियुक्ति में प्राथमिकता नहीं दी गई है।
वर्ष 2024 मे पूर्व गोविन्द राम चौहान पूर्व कोटवार एवं उसके पिता सेवक राम चौहान द्वारा अपने 50 रु के स्टाम्प पेपर मे एक नोटरास्ड शपथ पत्र के माध्यम से एक ट्रांसपोर्टर के माध्यम से रायगढ़ के विभिन्न पॉवर कम्पनियो से अपने कोटवारी भूमि को निजी बताते हुए कोटवारी भूमि पर कोटवार द्वारा बनाये गए अवैध खदान को समतलीकरण करने सहमति/अनुबंध किया गया था। जिसके आधार पर पर्यावरण विभाग से अनुमति लेकर समतलीकरण किया गया है। कोटवारी भूमि को निजी बताना पूरी तरीके से जलसाली और 420 होने संकेत प्रतीत होते है।
ग्राम बोंदा में नियुक्त नए कोटवार डॉक्टर पिता हलधर के संबंध में उन्होंने बताया कि ग्राम बोंदा के मिशल, अधिकार अभिलेख तथा कोटवारी पंजी के अनुसार उनके पिता हलधर चौहान, बड़े दादा चमरा तथा परदादा कुलधर पूर्व में ग्राम बोंदा के कोटवार रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त नियुक्त कोटवार द्वारा वर्ष 2015 का ग्राम बोंदा का निवास प्रमाण पत्र भी आवेदन के साथ प्रस्तुत किया गया था, जिसके आधार पर उनकी नियुक्ति नियमानुसार की गई है।तहसीलदार ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लगाए गए अन्य सभी आरोपों को निराधार एवं असत्य बताते हुए कहा कि संपूर्ण प्रक्रिया नियमों के अनुरूप संपन्न की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला वर्तमान में वरिष्ठ न्यायलय में अपील विचाराधीन है हितबद्ध पक्षकार अपना पक्ष रख अनुतोष प्राप्त कर सकते है।



