बोन्दा में केज व्हील ट्रैक्टर जब्ती पर बढ़ा विवाद: किसान ने लगाए गंभीर आरोप, कहा – साजिश के तहत फसाया गया..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया तहसील के ग्राम बोन्दा में केज व्हील युक्त ट्रैक्टर जब्त किए जाने की कार्रवाई अब विवादों में आ गई है। एक ओर प्रशासन का दावा है कि बिना पट्टी लगाए कैज व्हील वाली ट्रैक्टर सड़क पर चलाया गया, वहीं दूसरी ओर किसान तोषराम पटेल ने पूरी कार्रवाई को गलत बताते हुए अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि उन्हें बिना गलती के फंसाया जा रहा है।

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किसान द्वारा खेत में खड़ी की गई ट्रैक्टर

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, शनिवार 11 जुलाई को राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम बोन्दा में बिना पट्टी लगे डबल केज व्हील वाले सोनालिका ट्रैक्टर को जब्त कर लिया। ट्रैक्टर को ग्राम पंचायत बोन्दा के सरपंच की सुपुर्दगी में सीलबंद कर रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि ट्रैक्टर सड़क पर बिना पट्टी के चलाया गया है, इसलिए मोटर व्हीकल एक्ट एवं अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।

किसान के नामौजूदगी में निकाली गई ट्रैक्टर

किसान ने सुनाई पूरी कहानी

ट्रैक्टर मालिक तोषराम पटेल का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह एकतरफा और तथ्यहीन है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम खेत में धान बोनी की तैयारी के दौरान ट्रैक्टर में केज व्हील पर पट्टी लगाकर खेत में उतारा गया था और पट्टी निकालकर काम किया गया था। काम पूरा होने के बाद चोरी की आशंका को देखते हुए पट्टियां घर ले गए, जबकि ट्रैक्टर को खेत के अंदर ही छोड़ दिया गया। किसान के अनुसार, शनिवार सुबह वह पट्टियां और धान का बीज लेकर खेत पहुंचे तो देखा कि तहसीलदार और उनकी टीम पंचनामा तैयार कर रही थी। अधिकारियों ने उनसे पंचनामे में हस्ताक्षर करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

मेरी गैरमौजूदगी में ट्रैक्टर खेत से निकाला गया

तोषराम पटेल का आरोप है कि ट्रैक्टर मुख्य सड़क से लगभग 300 मीटर दूर खेत के अंदर खड़ा था। उनकी अनुपस्थिति में अधिकारियों ने ड्राइवर बुलाकर ट्रैक्टर को खेत से बाहर निकलवाया, सड़क तक ले गए और फिर बैक करते हुए दोबारा खेत में उतारा। किसान का कहना है कि इसी दौरान केज व्हील के निशान बने और बाद में उन्हीं निशानों को आधार बनाकर यह साबित करने की कोशिश की गई कि ट्रैक्टर सड़क पर चलाया गया था। किसान का कहना है कि यदि ट्रैक्टर पहले से सड़क पर चल रहा था, तो मौके पर ही क्यों नहीं रोका गया? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी गलती के उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

तहसीलदार का पक्ष भी अलग

इस मामले में तहसीलदार कोमल साहू ने बताया कि जांच के दौरान केज व्हील वाले ट्रैक्टर के सड़क से खेत तक जाने के स्पष्ट निशान मिले हैं। उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर ट्रैक्टर जब्त किया गया है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की गई है।

सरपंच ने क्या कहा?

ग्राम पंचायत बोन्दा के सरपंच गोबर्धन निषाद ने बताया कि वह निजी कार्य से रायपुर गए हुए थे और देर रात गांव लौटे। शनिवार सुबह देर से उठने के कारण वह समय पर मौके पर नहीं पहुंच सके। तहसीलदार का फोन आने के बाद जब वह घटनास्थल पहुंचे, तब तक ट्रैक्टर सड़क किनारे खड़ा था।

अब उठ रहे हैं कई सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसान का दावा सही है और ट्रैक्टर पहले से खेत के अंदर खड़ा था, तो उसकी अनुपस्थिति में ट्रैक्टर को खेत से निकालकर सड़क तक ले जाना और फिर उसी आधार पर जब्ती की कार्रवाई करना कितना उचित है? यदि ऐसा हुआ है, तो यह पूरी कार्रवाई निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। वहीं यदि प्रशासन के दावे सही हैं, तो इसकी पुष्टि भी निष्पक्ष जांच से होनी चाहिए।

सोमवार को कलेक्टर से होगी शिकायत

किसान तोषराम पटेल शनिवार को शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन अवकाश होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। अब उन्होंने सोमवार को कलेक्टर से मिलकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत देने और निष्पक्ष जांच की मांग करने की बात कही है। अब पूरे मामले पर जिले की निगाहें कलेक्टर कार्यालय पर टिकी हैं। सोमवार को किसान की शिकायत के बाद प्रशासन क्या निर्णय लेता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह इस विवाद की दिशा तय करेगा।

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