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सारंगढ़-बिलाईगढ़// साल्हेओना धान उपार्जन केंद्र में करीब 99 लाख रुपये के फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस अब तक समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, भृत्य, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी और चौकीदार सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। लेकिन इस पूरे मामले में प्राधिकृत अधिकारी और नोडल अधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जांच में सामने आया है कि बिना वास्तविक धान खरीदी के 3140.80 क्विंटल धान की फर्जी ऑनलाइन एंट्री की गई, जिससे शासन को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। ऐसे में लोगों का कहना है कि धान खरीदी केंद्र की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की थी, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब इतनी बड़ी अनियमितता हुई तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है।
क्षेत्र में चर्चा है कि छोटे कर्मचारियों पर तो कार्रवाई हो गई, लेकिन प्राधिकृत अधिकारी और नोडल अधिकारी अब तक जांच और कार्रवाई से बाहर नजर आ रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच केवल कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।


