महासमुंद एलपीजी गैस गबन कांड में बड़ी कार्रवाई, जिला खाद्य अधिकारी के बाद अब मुख्य आरोपी पिता-पुत्र महाराष्ट्र से गिरफ्तार..

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महासमुंद// छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सामने आए करोड़ों रुपये के एलपीजी गैस गबन और कालाबाजारी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है। महासमुंद पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे संतोष सिंह ठाकुर और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पुलिस की नजर से बचने के लिए होटल में छिपकर रह रहे थे।

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पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना के बाद से दोनों आरोपी लगातार फरार थे। उनकी तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई थीं, जिन्हें अलग-अलग राज्यों में भेजा गया था। जांच के दौरान पुलिस ने रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर तक आरोपियों की तलाश की।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया गया। लगातार निगरानी के बाद पुलिस को सूचना मिली कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से होटल में दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तारी के दौरान संतोष सिंह ठाकुर के पास से 20 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मामले में शामिल अन्य लोगों और नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

पुलिस के अनुसार इस मामले में पहले ही कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी के मैनेजर पंकज चंद्राकर, ठाकुर पेट्रो केमिकल्स के कर्मचारी निखिल वैष्णव और मनीष चौधरी शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की गई एलपीजी गैस को लगभग 90 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया गया था।

क्या है पूरा मामला ..?

पुलिस के अनुसार पूरा मामला 24 दिसंबर 2025 का है। उस दिन सिंघोड़ा पुलिस ने एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था। बाद में मार्च 2026 में भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर इन ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को सौंपी गई थी।

खाद्य विभाग की मौजूदगी में इन वाहनों को उरला रायपुर स्थित ठाकुर पेट्रो केमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्द किया गया था। लेकिन बाद में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। पांच कैप्सूल ट्रकों से करीब 87 टन एलपीजी गैस गायब पाई गई। जांच में पता चला कि गबन की गई गैस की कीमत लगभग 77 लाख रुपये थी, जबकि इसे करीब 90 लाख रुपये में बेचने की तैयारी की गई थी। मामले के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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