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सारंगढ़-बिलाईगढ़// बरमकेला स्थित अपेक्स बैंक शाखा में सामने आए लगभग 10 करोड़ रुपए के बहुचर्चित वित्तीय घोटाले में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं। पुलिस द्वारा फरार लेखाधिकारी मीनाक्षी माझी को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब तक इस मामले में चार आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे प्रकरण के बीच किसानों ने भी अपने हक और पैसों का हिसाब मांगना शुरू कर दिया है। बड़े नवापारा समिति से जुड़े किसान ताराचंद पटेल द्वारा दिया गया आवेदन अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
17 समितियां, 887 किसान और करीब 10 करोड़ की गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2024 से 6 नवंबर 2024 के बीच बरमकेला अपेक्स बैंक शाखा से जुड़े 17 सेवा सहकारी समितियों के 887 किसानों के केसीसी खातों में गड़बड़ी की गई। जांच में सामने आया कि डीएमआर कैश और काइंड बैलेंस को शून्य करते हुए लगभग ₹9.91 करोड़ की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर नकद आहरण किया गया।
यह पूरा मामला बड़े नवापारा, बोंदा, दुलोपाली, लेंध्रा, लोधिया, लुकापारा, साल्हेओना, सरिया, तौसीर, देवगांव, गोबरसिंघा, कालाखूंटा, कंठीपाली, करनपाली, कुम्हारी और पंचधार समितियों से जुड़ा बताया गया है। इतनी बड़ी संख्या में समितियों और किसानों के नाम सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि बैंक कर्मचारियों द्वारा निजी बैंकिंग आईडी और अलग-अलग लॉगिन का उपयोग कर लेन-देन किए गए तथा कई मामलों में बिना वाउचर रकम निकाली गई। बैंक मुख्यालय की ऑनलाइन रिपोर्ट जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने इस प्रकरण में शाखा प्रबंधक डीआर वाघमारे, लेखाधिकारी मीनाक्षी माझी, लिपिक आशीष पटेल और गार्ड खीरदास महंत सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें चार की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि बाकी की तलाश जारी है।
अब किसान मांग रहे हैं एक-एक पैसे का हिसाब
इसी बीच ग्राम विक्रमपाली निवासी किसान ताराचंद पटेल का आवेदन इस मामले में नई चर्चा लेकर आया है। ताराचंद पटेल ने अपेक्स बैंक शाखा बरमकेला प्रबंधन को पत्र लिखकर सेवा सहकारी समिति बड़े नवापारा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं। उन्होंने किसानों द्वारा जमा कराई गई शेयर राशि का पूरा ब्यौरा, उसकी पावती की प्रतिलिपि और वर्ष 2023-24, 2024-25 तथा 2025-26 के दौरान धान खरीदी में मिली कमीशन राशि का मदवार आय-व्यय विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है।


ताराचंद पटेल का कहना है कि जब किसानों के खातों से करोड़ों रुपए की गड़बड़ी सामने आ चुकी है, तब समितियों के वित्तीय लेन-देन और किसानों के अंशदान का भी पारदर्शी रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। उनका आवेदन अब केवल सूचना मांगने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे किसानों की जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग के रूप में देखा जा रहा है।
साल्हेओना में त्वरित कार्रवाई, तो बाकी जगह जांच क्यों नहीं?
इस मामले में स्थानीय स्तर पर एक और सवाल चर्चा में है। हाल ही में साल्हेओना समिति में धान खरीदी और भौतिक सत्यापन के दौरान लगभग 99 लाख रुपए से अधिक की गड़बड़ी सामने आने पर समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की गई थी। ऐसे में अब अपेक्स बैंक घोटाले से जुड़ी समितियों और उनके प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों के बीच यह चर्चा तेज है कि जब करोड़ों के बैंक घोटाले में समिति स्तर की गतिविधियां जांच के दायरे में हैं, तो संबंधित समितियों के वित्तीय रिकॉर्ड और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियों द्वारा अभी अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
क्या आवेदन खोलेगा नई जांच का रास्ता?
बरमकेला अपेक्स बैंक घोटाला पहले ही जिले के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में गिना जा रहा है। अब किसान ताराचंद पटेल का आवेदन इस पूरे प्रकरण में नई परत जोड़ता नजर आ रहा है। किसानों का कहना है कि वे केवल आरोप नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर अपने हिस्से और समिति संचालन का हिसाब चाहते हैं।
अब निगाहें जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या यह आवेदन आगे किसी नई जांच का आधार बनेगा, या फिर सवालों का जवाब आने में अभी और इंतजार करना पड़ेगा।




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