मौहापाली में खनिज विभाग की छापेमारी से मचा हड़कंप, कथित लेनदेन और कार्रवाई पर उठे सवाल..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// गुरुवार सुबह सरिया तहसील क्षेत्र के मौहापाली में खनिज विभाग की अचानक हुई छापेमारी से अवैध खदान संचालकों में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह विभाग की टीम के पहुंचते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूत्रों के मुताबिक कार्रवाई के दौरान मौके पर कई वाहन और मशीनें मौजूद थीं, जिनका उपयोग अवैध डोलोमाइट उत्खनन में किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि विभाग ने एक भारी जेसीबी मशीन को जब्त किया, लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई सवाल भी खड़े होने लगे हैं।

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स्थानीय सूत्रों का दावा है कि छापेमारी के दौरान मौके पर कुल पांच गाड़ियां पकड़ी गई थीं, लेकिन कार्रवाई केवल एक वाहन पर की गई। बाकी वाहनों को कथित तौर पर लेनदेन के बाद छोड़ दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में जोर पकड़ रही है। हालांकि इस मामले में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लोगों का कहना है कि यदि मौके पर अवैध उत्खनन हो रहा था तो फिर बाकी वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इससे पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

अवैध खदानों पर नहीं हुई सीलिंग कार्रवाई

कार्रवाई को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन स्थानों पर छापेमारी की गई, वहां संचालित खदानें कथित तौर पर अवैध बताई जा रही हैं, लेकिन खदानों को सील करने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खदानें नियमों के खिलाफ संचालित हो रही थीं तो उन्हें तत्काल बंद कर सील किया जाना चाहिए था। इससे यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जिले में अवैध खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है और कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।

कई गांवों में लंबे समय से जारी है अवैध उत्खनन

जानकारी के अनुसार सरिया तहसील क्षेत्र के कटंगपाली, मौहापाली, जोतपुर, छैलफोरा, नौघटा, बिलाईगढ़ अ, छूहीपाली सहित अन्य गांवों में लंबे समय से अवैध डोलोमाइट पत्थर का उत्खनन और परिवहन खुलेआम जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई क्रेशर बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ की लीज और लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बावजूद काम जारी है। इसके अलावा भंडारण क्षमता से ज्यादा क्रशिंग किए जाने की भी शिकायतें सामने आती रही हैं।

खनिज विभाग और टास्क फोर्स की भूमिका पर उठे सवाल

लगातार सामने आ रही शिकायतों और अवैध उत्खनन के बावजूद खनिज विभाग और जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई होती तो अवैध खदानों का संचालन इतने लंबे समय तक खुलेआम नहीं चलता। लोगों का आरोप है कि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रहती है, जबकि बड़े स्तर पर चल रहे अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर टास्क फोर्स और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की निगरानी के बावजूद अवैध खनन का यह खेल किसके संरक्षण में जारी है।

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