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मुंगेली// नगर पालिका की राजनीति इन दिनों गर्म है। नगरपालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला को नगरीय प्रशासन विभाग के उप सचिव की ओर से नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। आरोप है कि पीआईसी (परिषद की स्थायी समिति) की बैठक नियमित रूप से नहीं ली जा रही थी। नोटिस में साफ कहा गया है कि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है।
नोटिस के बाद बढ़ी कुर्सी पर तलवार
नोटिस जारी होते ही शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठने लगा है कि क्या अध्यक्ष की कुर्सी जा सकती है। फिलहाल स्थिति साफ नहीं है, लेकिन विभाग की कार्रवाई के बाद दबाव जरूर बढ़ गया है।


कानूनी प्रक्रिया क्या कहती है?
नगरपालिका अधिनियम के तहत किसी अध्यक्ष को सीधे हटाना आसान नहीं होता। यदि कर्तव्यों में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के आरोप साबित होते हैं, तो पहले कारण बताओ नोटिस और फिर जांच की प्रक्रिया होती है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ही आगे की कार्रवाई संभव होती है। यानी फैसला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और जवाब पर निर्भर करेगा।
अध्यक्ष का पलटवार; मंत्री पर साधा निशाना
नोटिस के बाद अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें हटाने के लिए राजनीतिक षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा, “अगर मुझसे इस्तीफा चाहिए तो सामने आकर मांगें, मैं खुद पद छोड़ दूंगा, लेकिन इस तरह प्रशासनिक दबाव बनाना गलत है।”
सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
शुक्ला ने आरोप लगाया कि विपक्षी जनप्रतिनिधियों को हटाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया।
अब आगे क्या?
पूरे मामले के बाद मुंगेली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि विभाग को दिया जाने वाला जवाब कितना मजबूत होता है और आगे क्या फैसला लिया जाता है। फिलहाल शहर में एक ही चर्चा है कि यह प्रशासनिक कार्रवाई है या सियासी चाल, और क्या अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचा पाएंगे?




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