शिक्षा विभाग के रिटायर्ड लेखापाल के सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा: भाई और परिजनों ने ही रची साजिश, 11 आरोपी और 4 नाबालिग गिरफ्तार..

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मुंगेली// जिले में सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर राजपूत की अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। थाना लालपुर क्षेत्र के ग्राम मनोहरपुर से अपहरण के बाद हुई इस हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि साजिश के पीछे खुद मृतक के भाई और परिजन ही मास्टरमाइंड निकले। पुलिस ने इस मामले में 11 आरोपियों सहित 4 नाबालिगों को गिरफ्तार किया है। पूरे मामले का खुलासा सीसीटीवी फुटेज और “त्रिनयन एप” के जरिए तैयार किए गए रूट चार्ट से हुआ।

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सीसीटीवी और त्रिनयन एप से खुला राज

मामले की शुरुआत 21 मार्च को हुई, जब दामोदर राजपूत लापता हो गए और उनकी मोटरसाइकिल मनोहरपुर के पास मिली। जांच के दौरान पुलिस ने जिले के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स और आसपास के कैमरों को खंगाला, जिसमें एक संदिग्ध ग्रे रंग की ईऑन कार लगातार उनके पीछे चलती नजर आई। त्रिनयन एप के जरिए उस कार का नंबर ट्रेस कर पुलिस ने मालिक तक पहुंच बनाई और फिर कड़ी पूछताछ में पूरा षड्यंत्र सामने आ गया।

संपत्ति के लालच में रची गई हत्या की साजिश

जांच में सामने आया कि दामोदर राजपूत की करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके ही भाई रणजीत, चचेरा भाई रामपाल और अन्य परिजनों ने सुपारी देकर हत्या की योजना बनाई थी। पहले बाप-बेटे के बीच विवाद को हवा दी गई, फिर फर्जी वचनपत्र तैयार कर संपत्ति अपने नाम कराई गई। इसके बाद 10 लाख रुपये और जमीन के लालच में सुपारी किलर संजय यादव और उसके साथियों को हत्या के लिए लगाया गया। आरोपियों ने सुनसान रास्ते पर गला घोंटकर हत्या की और शव को कवर्धा जिले के जंगल में दफना दिया।

सुपारी, वाहन और साजिश के सबूत जब्त

पुलिस ने आरोपियों के पास से 96 हजार रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त ईऑन कार, स्पेशियो गोल्ड कार, मोटरसाइकिल और स्कूटी जब्त की है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद मृतक का मोबाइल प्रयागराज ले जाकर गंगा में फेंक दिया गया, ताकि मामला भटकाया जा सके।

गिरफ्तार आरोपियों में रणजीत सिंह राजपूत (झाफल, लोरमी), पालेश्वर राजपूत (झाफल, लोरमी), रामपाल सिंह राजपूत (लोरमी), पराग सिंह राजपूत (झाफल, लोरमी), हेमंत राजपूत (झाफल, लोरमी), अजय राजपूत (सारधा), संजय यादव (झाफल, लोरमी), श्रवण उर्फ प्रिंस गोई (मुंगेली), योगेश गंधर्व उर्फ योगेश्वर (मुंगेली), देवराज साहू उर्फ दद्दू (झझपुरीकला, लोरमी) और आशीष कारीकांत उर्फ धर्मेन्द्र उर्फ बाबू (लोरमी) शामिल हैं, साथ ही 4 नाबालिग भी पकड़े गए हैं।

इस पूरे मामले के खुलासे में साइबर सेल प्रभारी प्रसाद सिन्हा, थाना प्रभारी लोरमी अखिलेश वैष्णव, थाना प्रभारी लालपुर सुन्दरलाल गोरले, थाना प्रभारी जरहागांव सतेन्द्रपुरी गोस्वामी, सउनि दिलीप प्रभाकर, प्र.आर. नोखेलाल कुर्रे, नरेश यादव, यशवंत डाहिरे, रवि जांगड़े, राजकुमार जांगड़े, बलदेव राजपूत, आर. भेषज पाण्डेकर, हेमसिंह गिरीराज सिंह, राहुल यादव, रवि मिन्ज, परमेश्वर जांगड़े, राकेश बंजारे, जितेन्द्र ठाकुर, रमाकांत डाहिरे, रामकिशोर कश्यप, तोरन सोनवानी, विजय बंजारे, रवि डाहिरे, देवेन्द्र नागरची, राहुलकांत कश्यप, जितेन्द्र सिंह, उमेश सोनवानी की अहम भुमिका रही।

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