CG में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी की तैयारी, वाहनों के लिए अधिक चार्जिंग पाइंट लगाए जाएंगे, कई तरह की भी मिलेगी छूट.

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रायपुर// छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग से नीति बनाने पर चर्चा शुरू हो गई है। परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने सोमवार को अंतर विभागीय बैठक बुलाई। इस दौरान नीति की जरूरत पर चर्चा हुई। फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधा बढ़ाने और प्रोत्साहित करने पर जोर है।

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परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा, छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रिक व्हीकल हब तथा पर्यावरण प्रदूषण रहित राज्य के रूप में नई पहचान देना है। उन्होंने कहा, इलेक्ट्रिक व्हीकल पार्क तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यवस्थित चालन तथा चार्जिंग के लिये चार्जिंग स्टेशन का निर्माण करना भी आवश्यक है। कुछ नगरीय निकायों और कंपनियों ने अपने स्तर पर चार्जिंग स्टेशन बनाए हैं। इसके बाद भी इनकी संख्या काफी कम है। इनकी संख्या में और वृद्धि करना आवश्यक होगा। जिससे आम लोगों को सुगमता से वाहन चार्जिंग की सुविधा प्राप्त हो सके।

परिवहन मंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सोलर उर्जा के लिये उत्तम है। इसका उपयोग कर वाहनों के चार्जिंग हेतु सोलर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं। बैठक में वन एवं उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, परिवहन सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त दीपांशु काबरा, सहायक परिवहन आयुक्त शैलाभ साहू, लीपड्राफ्ट कान्सलटेंट नितिन सिंगला आदि शामिल हुए थे।

अभी ई-रिक्शा और ई-कार्ट पर ही राहत

छत्तीसगढ़ में अभी ई-कार्ट तथा ई-रिक्शा में पांच वर्षों के लिये मोटरयान कर में छूट दी गई है। छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम, बैटरी चलित ई-रिक्शा के लिये ऋण प्रदान कर रहा है। ई-रिक्शा एवं ई-कार्ट वाहनों का फिटनेस, नवीनीकरण तीन वर्षों के लिये किया जा रहा है। निर्माण श्रमिक ई-रिक्शा सहायता योजना लागू की गई है। जिसके तहत छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एकमुश्त 50 हजार रुपए का अनुदान देता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 66 के अधीन परमिट से छूट भी दी गई है।

इसलिए बताई जा रही प्रोत्साहन की जरूरत

वन, आवास एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बैठक में कहा, वायु प्रदूषण में कमी लाने तथा ऊर्जा की मांग को ध्यान में रखकर सौर ऊर्जा का उपयोग मुख्य विकल्प के रूप में दिख रहा है। राज्य में वाहनों के संचालन हेतु पेट्रोल तथा डीजल का उपयोग किया जा रहा है। जिसकी पूर्ति के लिये अन्य देशों पर निर्भरता बनी हुई है तथा समय के साथ लगातार इसके मूल्यों में वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थिति में इलेक्ट्रिक वाहन एक अच्छे विकल्प के रूप में उभरकर आया है।

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