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रायपुर// रायपुर पुलिस ने मंगलवार को गुरुग्राम से जीपी सिंह को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद सड़क के रास्ते उन्हें रायपुर लाया गया है। उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो के दफ्तर लाया गया है। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड ली जाएगी। इस पूरी कार्रवाई में आधिकारिक तौर पर एंटी करप्शन ब्यूरो के अफसरों ने ये कबूला है कि जीपी सिंह पूरी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्हें कई बार पेश होने की नोटिस भेजा गया, मगर वो नहीं आए इसलिए उन्हें पकड़ा गया।
खबर है कि सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से जीपी सिंह ने अपने ऊपर लगे राजद्रोह, आय से अधिक संपत्ति मामले में सलाह करने गए हुए थे। इसी दौरान पुलिस की एक टीम लगातार रायपुर से गुड़गांव तक जीपी सिंह का पीछा करते हुए पहुंची थी। मौका पाकर टीम ने जीपी सिंह को दबोच लिया।
बता दें कि कुछ साल पहले जीपी सिंह खुद एंटी करप्शन विभाग के चीफ थे। अफसर पर आरोप लगा है कि वो इस दौरान कुछ लोगों से अवैध वसूली करते थे, धमकाते थे और सरकार के खिलाफ किसी साजिश में शामिल थे।
जीपी सिंह और उनसे जुड़े मामले
- 1 जुलाई की सुबह 6 बजे ACB-EOW की टीमों ने रायपुर, राजनांदगांव और ओडिशा में एक साथ छापा मारा।
- जीपी सिंह पर FIR दर्ज की गई। दूसरे दिन शुक्रवार को दिन भर की जांच के बाद 5 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ। 10 करोड़ की संपत्ति मिलने और इसके बढ़ने की आधिकारिक जानकारी दी गई।
- रायपुर में एक युवक से मारपीट, भिलाई में सरेंडर करने वाले नक्सल कमांडर से रुपयों का लेन-देन, रायपुर में एक केस में आरोपी की मदद का इल्जाम भी जीपी सिंह पर लगा है। इन पुराने केस की फिर से जांच की जा रही है।
- इन तमाम मामलों के बीच 5 जुलाई को राज्य सरकार ने ADG जीपी सिंह को एक आदेश पत्र में यह लिखते हुए निलंबित कर दिया कि एक अफसर से ऐसी अपेक्षा नहीं थी।



