सारंगढ़ में चूना पत्थर खदान के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़कर कलेक्ट्रेट घेरा, ई-नीलामी रद्द करने की मांग..

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सारंगढ़ बिलाईगढ़// लगभग 1800 एकड़ में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान की ई-नीलामी के विरोध में बुधवार को सारंगढ़ में जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों में आम नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे।

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हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए जब कलेक्ट्रेट पहुंचने से रोकने के लिए लगाई गई पुलिस बैरिकेडिंग को ग्रामीणों ने तोड़ दिया और आगे बढ़ते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया। इसके बाद कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर खदान की ई-नीलामी रद्द करने की मांग की गई।

घनी आबादी वाले क्षेत्र में खदान का विरोध

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वार्ड क्रमांक 01 कुटेला, वार्ड क्रमांक 02 भोजपुर, वार्ड क्रमांक 10 खैरहा जूनाडीह सहित शहर से लगे कई गांव जैसे रांपागुला, दुर्गापाली, हरिहरपाली, चंदाई, खम्हारडीह, पचपेडी, भैसदेहान, गाताडीह और सुल में खदान के लिए ई-नीलामी प्रस्तावित है। ये सभी क्षेत्र घनी आबादी वाले हैं, जहां खनन गतिविधि शुरू होने से लोगों के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।

स्वास्थ्य और भवनों को नुकसान का खतरा

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र के आसपास जिला अस्पताल, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला पंचायत भवन, स्कूल-कॉलेज, छात्रावास, न्यायालय और अन्य कई महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। ऐसे में खनन के दौरान होने वाली ब्लास्टिंग से ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। साथ ही कंपन और झटकों से भवनों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर के मास्टर प्लान के अनुसार यह क्षेत्र आवासीय और मिश्रित उपयोग के अंतर्गत आता है, जहां खनन गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। साथ ही पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति और जनसुनवाई जैसी जरूरी प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन में शामिल जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने साफ कहा कि यदि प्रस्ताव को जल्द रद्द नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र होगा। उनका कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे सारंगढ़ में इस तरह की खदान परियोजना शहरी विकास के खिलाफ है और इससे राष्ट्रीय राजमार्ग व अन्य परियोजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। अंत में सभी ने प्रशासन से जनहित, सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए चूना पत्थर खदान की ई-नीलामी तत्काल रद्द करने की मांग की।

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