बंद योजनाओं के जमा अवशेष राशि के सम्बन्ध में कलेक्टर ने ली बैठक, सभी चिन्हित डीडीओ को कलेक्टर ने प्रक्रिया पालन करने के निर्देश दिए..

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सारंगढ़ बिलाईगढ़// कलेक्टर एवं जिला प्रमुख डॉ संजय कन्नौजे की अध्यक्षता में वित्तीय मामलों से जुड़े बंद योजनाओं के अवशेष राशि को जमा करने के सम्बन्ध में जिले के चिन्हित आहरण एवं संवितरण (डीडीओ) अधिकारियो के साथ कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में बैठक लिया गया। कलेक्टर ने ऐसे बैंक खाता से प्रक्रिया पालन करने के निर्देश दिए। जिला कोषालय अधिकारी उत्तम तुरकाने ने कहा कि, ऐसे बैंक खाता जिसमें राशि 10 साल से अधिक अवधि तक जमा है, उसको प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया का पालन कर वह राशि प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर उप कोषालय अधिकारी हरिराम पटेल उपस्थित थे।

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डीफ बैंक अकाउंट क्या है ?

डीफ बैंक अकाउंट वह होता है जिसमें 10 साल से अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। ऐसे अकाउंट्स को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीफ) में ट्रांसफर कर दिया जाता है

डीफ बैंक अकाउंट को एक्टिव करने के लिए:

  • बैंक में जाकर केवाईसी अपडेशन कराएं
  • आवश्यक दस्तावेज जमा करें, जैसे पासपोर्ट, वोटर आईडी, आधार कार्ड, आदि
  • बैंक में एक डेबिट लेन-देन करे।

आरबीआई के नियम :

  • 2 साल से अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं होने पर अकाउंट निष्क्रिय हो जाता है
  • 10 साल से अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं होने पर अकाउंट डीफ हो जाता है
  • अगर किसी व्यक्ति या उसके बुजुर्ग या कोई भी उम्र के व्यक्ति जिनका 10 साल पुराना पैसा जमा है वो बैंक अकाउंट डीफ हो गया है, तो आप बैंक में जाकर इसे एक्टिव करा सकते हैं और जमा राशि वापस पा सकते हैं।

यदि कोई बैंक खाता 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निष्क्रिय (कोई लेन-देन नहीं हुआ) है, तो उसे लावारिस खाता मानकर आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यह धनराशि सुरक्षित रहती है और आप अपने बैंक को केवाईसी दस्तावेज़ सहित एक अनुरोध भेजकर मूल खाताधारक, उत्तराधिकारी या कानूनी वारिस दावा शुरू कर इसे प्राप्त कर सकते हैं।

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