जेल से लौटे तारापुर उपसरपंच राजीव डनसेना की जीत, डिग्री लाल सिदार की सरपंची खत्म..

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रायगढ़// रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत तारापुर में कई दिनों से चल रही पंचायत राजनीति का बुधवार को बड़ा फैसला सामने आया। सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ उपसरपंच राजीव डनसेना सहित आठ पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। मतदान के बाद प्रस्ताव पारित हो गया और डिग्री लाल सिदार को सरपंच पद से हटा दिया गया। अब पंचायत में नए सरपंच के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।

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अविश्वास प्रस्ताव पेश होने से लेकर मतदान तक का पूरा घटनाक्रम विवाद, पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी, ग्रामीणों के विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण चर्चा में रहा। कार्रवाई में देरी के आरोप के बाद मामला कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचा और मतदान से ठीक पहले उपसरपंच की गिरफ्तारी ने तारापुर की राजनीति को और गरमा दिया।

अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई में देरी का आरोप

उपसरपंच राजीव डनसेना और पंचायत के आठ पंचों ने सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद काफी समय तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव लाने वाले पंच और उपसरपंच कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचे। उन्होंने जल्द से जल्द अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की। इसके बाद प्रशासन की ओर से 10 सितंबर को मतदान की तारीख निर्धारित की गई।

मतदान से पहले रातों-रात गिरफ्तारी ने बढ़ाया विवाद

जन्माष्टमी से एक दिन पहले 3 सितंबर की रात पूरे मामले ने अचानक नया मोड़ ले लिया। कोतरा रोड थाना पुलिस उपसरपंच राजीव डनसेना को थाने ले गई। बताया गया कि सरपंच डिग्री लाल सिदार की शिकायत के आधार पर राजीव डनसेना के खिलाफ जातिगत गाली-गलौच के आरोप में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।पुलिस ने इसी मामले में राजीव डनसेना को गिरफ्तार किया। उनके साथ पंचायत के एक पंच की गिरफ्तारी की भी बात सामने आई। गिरफ्तारी के बाद राजीव डनसेना को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

राजीव डनसेना की गिरफ्तारी की खबर तारापुर पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके समर्थन में कोतरा रोड थाना पहुंच गए। ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। मामला बढ़ने पर खरसिया क्षेत्र के कांग्रेस विधायक उमेश पटेल सहित कांग्रेस के कई नेता भी कोतरा रोड थाना पहुंचे। समर्थकों और नेताओं की मौजूदगी में थाने के बाहर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा। समझाइश और बातचीत के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया।

ग्रामीणों ने लगाए फर्जी फंसाने के आरोप

राजीव डनसेना के समर्थक ग्रामीणों का आरोप था कि उन्होंने सरपंच डिग्री लाल सिदार के साथ किसी प्रकार की जातिगत गाली-गलौच नहीं की थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में चल रहे विवाद और अविश्वास प्रस्ताव के चलते राजीव डनसेना को द्वेषवश एससी-एसटी एक्ट के मामले में फंसाया गया। हालांकि, इन आरोपों पर दूसरे पक्ष का क्या कहना है, यह भी मामले का महत्वपूर्ण पक्ष है। पूरे मामले की वास्तविकता संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

जेल से लौटे, अगले दिन पलट गया पंचायत का समीकरण

करीब पांच दिन जेल में रहने के बाद राजीव डनसेना को जमानत मिली और वे गांव लौटे। खास बात यह रही कि उनके जेल से बाहर आने के अगले ही दिन ग्राम पंचायत तारापुर में सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान हुआ। मतदान के दौरान राजीव डनसेना सहित अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने वाले आठों पंचों को जीत मिली। इसके साथ ही डिग्री लाल सिदार की सरपंची खत्म हो गई। इस फैसले के बाद तारापुर पंचायत की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है।

राजीव बोले- यह पूरे गांव की जीत

अविश्वास प्रस्ताव में जीत के बाद राजीव डनसेना ने इसे अपनी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे गांव की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत तारापुर के ग्रामीणों, उनके साथ खड़े आठ पंचों और पूरे गांव की है। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष और जेल यात्रा के बाद मिली यह जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब उनका पूरा ध्यान गांव के विकास पर रहेगा। पंचायत के विकास कार्यों में योगदान देने, ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने और तारापुर के चौमुखी विकास के लिए काम किया जाएगा।

अब नए सरपंच के चुनाव का इंतजार

अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अब ग्राम पंचायत तारापुर में नए सरपंच के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। चुनाव की आधिकारिक घोषणा और प्रक्रिया प्रशासन द्वारा तय की जाएगी। सरपंच पद से डिग्री लाल सिदार के हटने के बाद पंचायत में नए नेतृत्व को लेकर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। तारापुर में आए इस बदलाव के बाद अब निगाहें नए सरपंच के चुनाव पर टिकी हैं। तारापुर पंचायत का यह घटनाक्रम कई मायनों में अहम माना जा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव से पंचायत की सत्ता का समीकरण बदला है, वहीं मतदान से ठीक पहले हुई गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और चर्चित बना दिया। अब नई पंचायत व्यवस्था गांव के विकास को किस दिशा में ले जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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