पोरथ धाम चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल हुए संजय जोशी, सरिया में हुआ भव्य स्वागत..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय जोशी बुधवार 14 जनवरी को सरिया प्रवास पर पहुंचे। उनके आगमन को लेकर पूरे क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह रायपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वे सरिया के लिए रवाना हुए, जहां दोपहर में आगमन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाजे-गाजे और आतिशबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

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सरिया अटल चौक में संजय जोशी का आत्मीय अभिनंदन किया गया। उन्होंने अटल प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपाई को नमन किया। इसके बाद वे अलेख महिमा आश्रम पहुंचे, जहां बाबाजी का आशीर्वाद लिया। आश्रम परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। यहां भोजन ग्रहण करने के बाद उनका काफिला धार्मिक यात्रा के लिए आगे बढ़ा।

अटल चौक से नदिगांव नावघाट पहुंचकर संजय जोशी नाव के माध्यम से महानदी से पोरथ घाट पहुंचे। पोरथ धाम स्थित शिव मंदिर में उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और मंचीय कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके बाद वे चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल हुए। महाआरती के दौरान घाट पर भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया।

कार्यक्रम के समापन के बाद संजय जोशी नाव से पुनः नदिगांव नावघाट लौटे और वहां से रायपुर के लिए प्रस्थान किया। इस पूरे प्रवास के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद उपासने उनके साथ मौजूद रहे। स्वागत कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रदीप सतपथी, नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, मनोज मेहर सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

पोरथ धाम की पौराणिक और धार्मिक महत्ता

बता दें कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर महानदी तट पर स्थित ग्राम पोरथ पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। इस दौरान त्रिवेणी संगम में श्रद्धालु निरोगता और आस्था की कामना के साथ पवित्र स्नान करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओड़िशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मान्यता है कि पुराणों में वर्णित पुलस्त्य ऋषि के आशीर्वाद से प्राचीन काल से यहां मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता रहा है। पोरथ धाम में पुलस्त्य ऋषि आश्रम के अलावा स्वयंभू शिवलिंग, कपिलेश्वर महादेव, राधा-कृष्ण मंदिर और कृष्णा गुरु आश्रम स्थित हैं। श्रद्धालु यहां दर्शन कर पतित पावनी चित्रोत्पला गंगा यानी महानदी में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं।

13वीं शताब्दी से जुड़ा है राजपरिवार का इतिहास

इतिहास के अनुसार 13वीं शताब्दी में सारंगढ़ के गिरीविलास पैलेस राजपरिवार के राजा संग्राम सिंह ने यहां शिव मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में राजा जवाहिर सिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। राजपरिवार द्वारा मंदिर के पुजारियों को भूमि आवंटित कर पट्टा भी दिया गया था। आज भी पुजारी उसी भूमि पर खेती-बाड़ी करते हुए मंदिर में पूजा-पाठ की परंपरा निभा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का एकमात्र मकर संक्रांति मेला

ग्राम पोरथ की यह धार्मिक स्थली छत्तीसगढ़ के मानचित्र में विशेष स्थान रखती है। छत्तीसगढ़ शासन की पुस्तक छत्तीसगढ़ नए भारत का प्रतीक में ग्राम पोरथ को तत्कालीन जिला रायगढ़ का एकमात्र मकर संक्रांति मेला स्थल घोषित किया गया है। यह मेला करीब 10 एकड़ क्षेत्र में आयोजित होता है और हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

तीर्थ और पर्यटन की अपार संभावनाएं

भौगोलिक दृष्टि से भी पोरथ धाम अत्यंत रमणीय स्थल है। यहां आने वाले श्रद्धालु महानदी में नौका विहार का आनंद लेते हैं और घाट पर स्नान करते हैं। स्थानीय स्तर पर अग्रवाल समाज द्वारा संगम स्थल पर कर्मकांड के लिए कई विकास कार्य किए गए हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

आस्था का केंद्र बनी तपोभूमि

पोरथ धाम से जुड़ी कई लोककथाएं और आस्थाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि प्राचीन काल में महानदी के दूसरे तट से एक काली गाय प्रतिदिन आकर स्वयंभू शिवलिंग के पास खड़ी हो जाती थी। लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैली इस तपोभूमि की मिट्टी का आज तक किसी ने दुरुपयोग नहीं किया और न ही खुदाई की गई। यही कारण है कि यह स्थान लोगों की गहरी आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

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