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रायपुर// झीरम घाटी हत्याकांड मामले में जगदलपुर की NIA कोर्ट द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। फैसले के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं भूपेश बघेल, दीपक बैज और उमेश पटेल ने अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हुए अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही, लेकिन साथ ही मामले में कथित राजनीतिक साजिश और बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झीरम घाटी हमले की जांच केवल हमले को अंजाम देने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पीछे यदि कोई बड़ी साजिश थी तो उसकी भी पूरी जांच होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब आगे कानूनी और राजनीतिक कदम उठाने की तैयारी में है।

भूपेश बघेल बोले- बड़े नक्सली नेताओं को बचाया गया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि NIA की जांच में बड़े नक्सली नेताओं को बचाया गया और हमले के पीछे के राजनीतिक षड्यंत्र की जांच नहीं हो सकी। भूपेश बघेल ने यह भी सवाल उठाया कि इतने बड़े हमले के बावजूद किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनकी सरकार ने झीरम मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए SIT का गठन किया था।
उनका दावा है कि NIA ने SIT की जांच को निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी थी। भूपेश के मुताबिक, उनकी सरकार जाने के बाद SIT की जांच आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि मामले में केवल आरोपियों को सजा मिलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमले के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
दीपक बैज ने कहा- NIA की जांच अभी अधूरी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी NIA की जांच पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि वे इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं और झीरम हत्याकांड की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। बैज ने झीरम हमले को राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि आखिर इस हमले के पीछे कौन था और बड़े नक्सली नेताओं तथा कमांडरों की भूमिका सामने क्यों नहीं आई। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा चल रही थी। गरियाबंद में भी ब्लास्ट की घटना हुई थी, इसके बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का विषय है।
दीपक बैज ने यह भी कहा कि मामले में जिन लोगों को दोषी माना गया है, वे बस्तर में बड़े स्तर पर पहचाने जाने वाले नक्सली नेता नहीं हैं। उनका सवाल है कि यदि इतने बड़े स्तर का हमला हुआ तो इसके पीछे मौजूद बड़े नक्सली कमांडरों की भूमिका और उनके नाम जांच में स्पष्ट क्यों नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे स्तर के नक्सलियों को आरोपी बनाया गया, जबकि बड़े नेताओं और कमांडरों से जुड़े सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। बैज ने FIR में बड़े नक्सली नेताओं के नाम होने और बाद में उनके हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए।
उमेश पटेल बोले- साजिश के पहलू पर स्थिति साफ नहीं
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता उमेश पटेल ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि झीरम मामले में साजिश यानी कांस्पिरेसी के पहलू पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है। उमेश पटेल ने कहा कि उनकी मांग केवल हमले में शामिल आरोपियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है। यदि झीरम घाटी हमले के पीछे कोई साजिश थी तो उसके पीछे कौन लोग थे, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस आगे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी और साजिश के पहलू की जांच के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। उनका कहना है कि अदालत के फैसले को स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन झीरम कांड से जुड़े उन सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है, जो हमले की व्यापक साजिश और उसके पीछे की भूमिका से जुड़े हैं।
मलकीत सिंह गेंदू ने भी जताया असंतोष
झीरम कांड के प्रत्यक्षदर्शी और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू ने भी NIA के फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस फैसले से न्याय नहीं मिला। गेंदू के मुताबिक, उनके समेत कई लोगों के बयान जांच एजेंसी ने लिए थे, लेकिन उन बयानों के आधार पर जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिन लोगों को दोषी माना गया है, वे छोटे स्तर के नेता हैं, जबकि बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका अभी भी स्पष्ट नहीं हुई है।
2013 के झीरम हमले में गई थी 29 लोगों की जान
बता दें कि 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और कई बड़े नेताओं समेत 29 लोगों को बर्बरता से मौत के घाट उतार दिया गया था। घटना के बाद से ही झीरम हमले के पीछे कथित राजनीतिक साजिश की जांच की मांग लगातार उठती रही है।
अब NIA कोर्ट द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद एक बार फिर यह सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है कि क्या केवल हमले में शामिल लोगों को सजा मिलने से झीरम कांड की पूरी सच्चाई सामने आ गई है या इसके पीछे कथित साजिश की अलग से जांच की जरूरत है।
कांग्रेस की आगे की रणनीति पर नजर
फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को यहीं खत्म करने के पक्ष में नहीं है। भूपेश बघेल ने NIA जांच और SIT को लेकर सवाल उठाए हैं, दीपक बैज ने बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका और कथित राजनीतिक षड्यंत्र की जांच की मांग दोहराई है, जबकि उमेश पटेल ने साजिश के पहलू को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की बात कही है। ऐसे में NIA कोर्ट के फैसले के बाद झीरम घाटी हत्याकांड का मामला एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति के साथ-साथ न्यायिक बहस के केंद्र में आ गया है।




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