शेयर करें...
रायपुर// शहरी पुलिसिंग को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार 23 जनवरी से राजधानी में कमिश्नर व्यवस्था लागू करने जा रही है, लेकिन इसके शुरू होने से पहले ही पुलिस विभाग के भीतर उत्साह की जगह असमंजस और संशय का माहौल बन गया है।
दरअसल, आईपीएस अधिकारियों के सामने एक तरह का “धर्म संकट” खड़ा हो गया है। एक ओर रायपुर शहर के 22 पुलिस थाने हैं, जिन पर प्रस्तावित पुलिस कमिश्नर का अधिकार क्षेत्र होगा, वहीं दूसरी ओर रायपुर देहात के 11 थानों के साथ-साथ धमतरी, बलौदाबाजार, महासमुंद और गरियाबंद जैसे चार जिलों का दायित्व आईजी स्तर के अधिकारी के पास रहेगा। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या 22 थानों की कमिश्नरी, चार जिलों और 11 थानों के आईजी पद के बराबर मानी जा सकती है। यही तुलना अब अफसरों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।
नवा रायपुर को लेकर भ्रम की स्थिति
कमिश्नरी व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल नवा रायपुर क्षेत्र को लेकर भी है। चर्चा है कि नवा रायपुर को पुलिस कमिश्नरेट के दायरे से बाहर रखकर ग्रामीण क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। ऐसे में नवा रायपुर रायपुर रेंज के अंतर्गत रहेगा और वहां देहात एसपी की तैनाती होगी। इस स्थिति में राजधानी के केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित कमिश्नरी के कारण पुलिस कमिश्नर के प्रभाव और अधिकार अपेक्षाकृत कम होने की आशंका जताई जा रही है।
ज्वाइंट कमिश्नर पद को लेकर असंतोष
पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद ज्वाइंट कमिश्नर का होगा, जिस पर डीआईजी रैंक के अधिकारी की नियुक्ति प्रस्तावित है। यहीं से अफसरों के बीच सबसे अधिक असंतोष उभर रहा है। वर्तमान में कई डीआईजी रैंक के अधिकारी बड़े और संवेदनशील जिलों में एसपी के रूप में स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में रायपुर कमिश्नरेट में एडिशनल एसपी जैसे कार्यभार वाला पद स्वीकार करना उन्हें पद और प्रभाव दोनों के लिहाज से पीछे जाना प्रतीत हो रहा है।
कमिश्नर की दौड़ में कौन आगे
पहले पुलिस कमिश्नर के लिए आईजी रैंक के अधिकारी की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। इस दौड़ में दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। रामगोपाल गर्ग की पहचान एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में रही है। वे करीब सात वर्ष तक सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर रह चुके हैं और कानून की गहरी समझ रखते हैं।
वहीं संजीव शुक्ला पहले रायपुर के एसपी रह चुके हैं और राजधानी की भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। हालांकि, जनवरी 2027 में उनके सेवानिवृत्त होने की वजह से यदि उनकी नियुक्ति होती है तो कार्यकाल महज 11 महीने का ही रहेगा। इसके अलावा अजय यादव और बद्री नारायण मीणा के नाम भी चर्चा में हैं, जो पहले रायपुर में पुलिस कप्तान रह चुके हैं।
ज्वाइंट कमिश्नर के लिए मंथन
सूत्रों के मुताबिक, यदि रामगोपाल गर्ग को पुलिस कमिश्नर बनाया जाता है, तो ज्वाइंट कमिश्नर के रूप में रायपुर की तासीर को समझने वाले किसी अनुभवी डीआईजी की तैनाती की जाएगी। इस पद के लिए रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह, एसआईबी में पदस्थ अजातशत्रु बहादुर सिंह, जशपुर एसपी शशि मोहन सिंह, बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह और दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल के नामों पर विचार किया जा रहा है। ये सभी अधिकारी पूर्व में रायपुर में सेवाएं दे चुके हैं।
अधिसूचना अब भी लंबित
कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने में अब महज कुछ दिन शेष हैं, लेकिन गृह विभाग अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं कर पाया है। बताया जा रहा है कि विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बावजूद दंडाधिकार को लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी के बीच खींचतान जारी है। इसी वजह से पुलिस कमिश्नर को मिलने वाले वास्तविक अधिकारों की तस्वीर अब तक साफ नहीं हो पाई है। ऐसे में राजधानी में कमिश्नर व्यवस्था की शुरुआत से पहले ही इसे लेकर सवाल और असमंजस गहराते जा रहे हैं।



