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रायपुर// छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस समय सदन का माहौल गरमा गया, जब मंत्री टंकराम वर्मा के विभागों से जुड़े बजट अनुदानों पर चर्चा के दौरान राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी सामने आई। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई और अंततः चर्चा का बहिष्कार कर दिया। अधिकारियों की अनुपस्थिति सदन में चर्चा का प्रमुख विषय बन गई, जिस पर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने भी चिंता जताई।
अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में तेजी से खुल रहे निजी विश्वविद्यालयों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, लेकिन उनके निरीक्षण और नियमन के लिए उच्च शिक्षा विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। चंद्राकर ने कहा कि कई निजी कॉलेजों में शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, फिर भी छात्रों से नियमित रूप से फीस वसूली जा रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति अन्य राज्यों से की जा रही है। चंद्राकर ने कहा कि इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या छत्तीसगढ़ में योग्य और प्रतिभाशाली शिक्षाविदों की कमी है। उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की और उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया।
इसी दौरान जब यह जानकारी सामने आई कि राजस्व सचिव समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी सदन में उपस्थित नहीं हैं, तो विपक्षी विधायक भड़क उठे। उन्होंने कहा कि जब सदन में किसी विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो रही हो, तब संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी होती है ताकि तथ्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर जवाब दिए जा सकें।
इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि वह स्वयं सदन में मौजूद हैं और सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। हालांकि विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और अधिकारियों को तुरंत सदन में बुलाने की मांग करते हुए चर्चा का बहिष्कार कर दिया।
इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार के मंत्रियों को अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही कमजोर हो गई है और अधिकारियों की भी सरकार के प्रति जिम्मेदारी कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
सदन में रायगढ़ जिले में अलसी बीज वितरण में कथित भ्रष्टाचार का मामला भी जोरदार तरीके से उठा। उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि बीज निगम ने अपने पसंदीदा ठेकेदार से बीज खरीदकर अनियमितता की है। उन्होंने कहा कि बीज की ग्रेडिंग के लिए भी उचित व्यवस्था नहीं थी, जिससे पूरे वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ सदस्य भी इस विषय पर चिंता जता रहे हैं। कई विधायकों ने अध्यक्ष से इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है ताकि भविष्य में सदन की कार्यवाही के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और चर्चा प्रभावी ढंग से हो सके।



