अब गांव की जरूरत के हिसाब से बनेगी विकास योजना, सारंगढ़ में VGPP और SECURE पर हुआ प्रशिक्षण..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// अब ग्राम पंचायतों में विकास की योजना सिर्फ कागजों पर औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि गांव की वास्तविक जरूरत और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। इसी को लेकर जनपद पंचायत सारंगढ़ के सभाकक्ष में विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM G के तहत VGPP और SECURE को लेकर बैठक और प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

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बैठक में जनपद पंचायत के सीईओ राधेश्याम नायक ने बताया कि ग्राम पंचायत विकास योजना (VGPP) तैयार करते समय ग्रामसभा और वार्ड सभाओं से लोगों की राय ली जाएगी। गांव में किन कामों की सबसे ज्यादा जरूरत है, किन परिवारों को प्राथमिकता की जरूरत है और रोजगार व आजीविका के क्या अवसर उपलब्ध हैं, इन सभी बातों को ध्यान में रखकर योजना तैयार करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि योजना में लोगों की भागीदारी, जरूरतमंद परिवारों की पहचान, जरूरतों का संतुलित आकलन और आंकड़ों के आधार पर योजना तैयार करना महत्वपूर्ण रहेगा।

कार्यक्रम अधिकारी युवराज पटेल ने बताया कि ग्राम पंचायत की योजना बनाते समय सिर्फ पुराने प्रस्तावों को दोहराने के बजाय स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। किस गांव में किस तरह के काम की जरूरत है, वहां उपलब्ध संसाधन क्या हैं और रोजगार व आजीविका के कौन से अवसर बढ़ाए जा सकते हैं, इसका आकलन कर कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रशिक्षण में मनरेगा के नए स्वरूप, रोजगार गारंटी, आजीविका बढ़ाने के काम और SECURE सॉफ्टवेयर के जरिए योजनाओं को ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। पंचायत प्रतिनिधियों और मैदानी कर्मचारियों को योजना तैयार करने से लेकर ऑनलाइन अपलोडिंग तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।

पहली बैठक में जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता राजीव सिंह, जनपद सदस्य और सरपंच मौजूद रहे। वहीं दूसरी बैठक में पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और मनरेगा से जुड़े कर्मचारी शामिल हुए। इसके अलावा तकनीकी सहायक, आवास मित्र सहित जनपद पंचायत के अधिकारी और बड़ी संख्या में मैदानी कर्मचारी प्रशिक्षण में उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में सभी ग्राम पंचायतों को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण VGPP तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने साफ कहा कि गांव की योजना बनाते समय स्थानीय जरूरत, आंकड़े, रोजगार और आजीविका के अवसरों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास कार्य वास्तव में ग्रामीणों के काम आ सकें।

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