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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जिले में अपराध जांच और कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में आज “मोबाइल फॉरेंसिक वाहन” का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों ने वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले ही जिले में डायल-112 के 10 नए आपातकालीन वाहनों की शुरुआत की गई थी और अब मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से पुलिस जांच प्रणाली को नई तकनीकी मजबूती मिलने जा रही है।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर पद्मिनी भोय साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे, जिला अभियोजन अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग के अधिकारी, अधिवक्ता संघ के सदस्य और पत्रकार मौजूद रहे। अधिकारियों ने इसे जिले की न्यायिक और पुलिस व्यवस्था के लिए बड़ा कदम बताया।
मौके पर ही जुटेंगे वैज्ञानिक साक्ष्य
मोबाइल फॉरेंसिक वाहन अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। इसमें रक्त नमूना परीक्षण किट, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण उपकरण, सीसीटीवी फुटेज निकालने की प्रणाली, हाई कैपेसिटी लैपटॉप और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर लगाया गया है। इसके अलावा रात के समय भी साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से रिकॉर्ड करने के लिए हाई-रिजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं। इस तकनीकी सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अपराध स्थल पर पहुंचते ही फॉरेंसिक टीम वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटा सकेगी। इससे कई बार जांच में होने वाली देरी और साक्ष्यों के नष्ट होने की समस्या पर रोक लग सकेगी।
जांच प्रक्रिया होगी तेज, न्यायिक कार्रवाई को मिलेगा बल
पुलिस और फॉरेंसिक विभाग के अनुसार अब जैविक और डिजिटल साक्ष्यों की प्राथमिक जांच मौके पर ही संभव होगी। इससे जांच की गति बढ़ेगी और न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। पहले कई मामलों में फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर या बिलासपुर पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे रिपोर्ट आने में लंबा समय लगता था। जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे ने कहा कि बदलते समय के साथ अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि अब घटनास्थल पर ही साक्ष्य संग्रहण होने से अपराध जांच ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद होगी।
कलेक्टर ने कहा : जांच में तेजी से मिलेगा न्याय
कलेक्टर पद्मिनी भोय साहू ने कहा कि न्याय में देरी का एक बड़ा कारण जांच और रिपोर्ट प्रक्रिया में लगने वाला समय होता है। मोबाइल फॉरेंसिक वाहन की उपलब्धता से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई व्यवस्था से अपराध जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पाण्डेय, उप पुलिस अधीक्षक संतोषी ग्रेस, एसडीओपी स्नेहिल साहू, रक्षित निरीक्षक जितेंद्र कुमार चंद्रा सहित पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिले में मोबाइल फॉरेंसिक वाहन की शुरुआत को आधुनिक पुलिसिंग और त्वरित न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।


