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रायपुर// छत्तीसगढ़ पुलिस में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक सरोकार की पहचान बन चुके के. आर. चौहान की यात्रा किसी प्रेरक फिल्म से कम नहीं है। बरमकेला ब्लॉक के छोटे से गांव करनपाली में एक ग्राम कोटवार के घर जन्मे के. आर. चौहान ने सीमित संसाधनों के बीच मेहनत, धैर्य और निरंतर संघर्ष से वह मुकाम हासिल किया, जहां आज वे युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं।

डीएसपी के. आर. चौहान की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई। 9वीं और 10वीं की पढ़ाई बोंदा हाई स्कूल से की, जबकि 11वीं और 12वीं की पढ़ाई गांव से रोज साइकिल चलाकर पूरी की। आगे की कॉलेज पढ़ाई के दौरान ट्यूशन पढ़ाना और निजी स्कूल में शैक्षणिक कार्य करना उनके जीवन का हिस्सा रहा। कठिन हालात में भी उन्होंने कभी लक्ष्य से नजर नहीं हटाई। उनका मानना रहा है कि मेहनत खामोशी से की जाती है और सफलता खुद शोर मचाती है।
उनकी काबिलियत और ईमानदारी का ही परिणाम रहा कि वर्ष 2008 से 2018 के बीच वे तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के सुरक्षा अधिकारी के रूप में तैनात रहे। इसी कार्यकाल में उप पुलिस अधीक्षक पद पर पदोन्नति मिली और तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा बैच लगाकर सम्मानित किया गया। यह क्षण उनके सेवाकाल का अहम और यादगार पड़ाव रहा।

वर्तमान में वे 6वीं वाहिनी रायगढ़ में सहायक सेनानी (डीएसपी रैंक) के पद पर कार्यरत थे। हाल ही में उन्हें जिला जशपुर में उप पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) के पद पर स्थानांतरित कर नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुरक्षा जैसे संवेदनशील दायित्व में उनकी तैनाती को विभागीय विश्वास और अनुभव का परिणाम माना जा रहा है।
पुलिस सेवा के साथ-साथ के. आर. चौहान का सामाजिक योगदान भी उतना ही मजबूत रहा है। रायगढ़ जिले में पदस्थापना के दौरान उन्होंने जरूरतमंद बच्चों और युवाओं के लिए SSEWA (Special Students Education Welfare Association) ग्रुप का गठन किया। इस मंच के जरिए शिक्षा, करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं को जागरूक किया गया और जमीनी स्तर पर लगातार सामाजिक गतिविधियां संचालित की गईं।
इसके साथ ही वे सृष्टि द डिफेंस एकेडमी, पुसौर रायगढ़ में प्रमुख मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। यहां युवाओं को डिफेंस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए प्रेरित किया जाता है। उनका स्पष्ट संदेश है कि राष्ट्र सेवा सर्वोपरि है और सही मार्गदर्शन मिले तो गांव का युवा भी देश की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
इस पूरे संघर्षपूर्ण और प्रेरक सफर में हर परिस्थिति में उनकी पत्नी निशा चौहान ने मजबूती से साथ निभाया। के. आर. चौहान का कहना है कि उनके जीवन में माता-पिता का आशीर्वाद हमेशा मार्गदर्शक रहा है, वहीं समाज, साथियों और मित्रों का सहयोग भी उन्हें हर कदम पर मिलता रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह यात्रा अकेले संभव नहीं थी। उल्लेखनीय है कि उनकी पत्नी निशा चौहान वर्तमान में रायगढ़ जिला के शासकीय हाई स्कूल सूपा में कार्यरत हैं और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
कोटवार परिवार से निकलकर सुरक्षा डीएसपी तक का सफर तय करने वाले के. आर. चौहान आज न केवल पुलिस विभाग बल्कि समाज की युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का मजबूत स्तंभ बन चुके हैं।



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