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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जिले में अवैध उत्खनन को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। टिमरलगा और कटंगपाली में कार्रवाई के दौरान कई पोकलेन मशीनें और वाहन पकड़े गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी वाहन पर ठोस कार्रवाई या प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में खनिज माफिया प्रशासन पर भारी पड़ रहे हैं?
टिमरलगा में पकड़ी गई थी 10 पोकलेन
जानकारी के मुताबिक बीते सोमवार को स्वयं एसडीएम ने खनिज विभाग की टीम के साथ टिमरलगा में छापामार कार्रवाई के दौरान अवैध खदान में उत्खनन करते हुए करीब 10 पोकलेन मशीनें पकड़ी थीं। मौके पर पंचनामा भी बनाया गया, लेकिन आगे की कार्रवाई ठंडी पड़ गई। न तो मशीनों को जब्त किया गया और न ही किसी के खिलाफ केस दर्ज हुआ। इसके बाद फिर से उसी जगह पर धड़ल्ले से खनन शुरू हो गया, जिससे प्रशासन की कार्रवाई पर संदेह गहराने लगा है।
कटंगपाली के बंद खदान में खनन
वहीं कटंगपाली में भी इसी तरह का मामला सामने आया। यहां गुरुवार को कटंगपाली-छैलफोरा में बंद पड़े खदान से बिना रॉयल्टी पर्ची के खनन कर खनिज को हाईवा वाहनों के जरिए भेजा जा रहा था। सूचना पर पहुंचे पंचायत पदाधिकारियों ने विरोध किया, जिसके बाद खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची और 4 पोकलेन मशीन व 2 हाईवा वाहन पाए गए। पंचनामा तो बना, लेकिन यहां भी आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है। वहीं दबी जुबान यह बात भी सामने आई है कि 5 लाख में मामला डील किया गया है।
खनिज जांच चौकी पहले से ही की गई बंद
जिले में पहले ही खनिज जांच चौकियां बंद होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं, और अब कार्रवाई के बाद भी केस दर्ज न होना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध उत्खनन के पीछे बड़े स्तर पर सांठगांठ हो सकती है, तभी इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा। फिलहाल हालात यह हैं कि जिले में अवैध उत्खनन बेखौफ जारी है और प्रशासन की सख्ती सिर्फ दावों तक सीमित नजर आ रही है।



