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सारंगढ़ बिलाईगढ़// जिले में अवैध खनन और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। खनिज विभाग की भूमिका और कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि विभागीय लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और खनिज परिवहन का खेल जारी है, जिससे शासन को राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों में कहा जा रहा है कि बीते दो वर्षों में जिले में अवैध खनन की गतिविधियों में तेजी आई है। आरोपों के अनुसार, सारंगढ़ में पदस्थ खनिज विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ा है और अवैध खनन से जुड़े मामलों में अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं दे रही है। सहायक खनिज अधिकारी बजरंग पैंकरा के कार्यकाल को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि जिले में खदानों की खुदाई और खनिज संसाधनों के दोहन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिले में कई स्थानों पर अवैध माइनिंग और खनिज परिवहन लगातार जारी है। उनका कहना है कि यदि समय पर निगरानी और कार्रवाई होती तो खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद नहीं होते। कुछ लोगों ने पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारी हीरादास भारद्वाज के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए तुलना भी की है और दावा किया है कि उस दौरान अवैध खनन पर अधिक नियंत्रण देखने को मिलता था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अवैध खनन, भंडारण, रॉयल्टी और परिवहन से जुड़े मामलों में गंभीर निगरानी की जरूरत है। लोगों का कहना है कि विभागीय छापेमारी और कार्रवाई की रिपोर्टें सामने आती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध खनन पूरी तरह रुकता नजर नहीं आता। इसी वजह से खनिज विभाग की भूमिका को लेकर संदेह और सवाल दोनों बढ़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस संबंध में पूर्व जिलाधिकारी डॉ. संजय कनौजे के कार्यकाल में भी शिकायतें किए जाने का दावा किया गया है। वहीं अब लोगों की निगाहें वर्तमान जिला प्रशासन पर टिकी हैं। हालांकि प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जिले में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कार्रवाई कब होगी, या फिर राजस्व नुकसान और खनन माफियाओं पर कथित मेहरबानी का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?




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