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सारंगढ़-बिलाईगढ़// बरसात के मौसम में मछलियों के प्रजनन और संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने बड़ी घोषणा की है। छत्तीसगढ़ नदी मत्स्योद्योग अधिनियम 1972 की धारा 3(2) के तहत राज्य में 15 अगस्त 2025 तक सभी तरह के जलाशयों, नदियों और अन्य जल स्रोतों में मछली पकड़ने (मत्स्याखेट) पर रोक लगाई गई है।
मछली पालन विभाग के प्रभारी एन.पी. ओगरे ने बताया कि यह फैसला मछलियों की संख्या बढ़ाने और उनके प्राकृतिक प्रजनन में बाधा रोकने के लिए लिया गया है। इस दौरान तालाबों और जल स्रोतों में मछली पकड़ना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि जिन तालाबों का नदी-नालों से कोई संबंध नहीं है या जिन जलाशयों में केज कल्चर किया जा रहा है, वे इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे।
यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल की जेल, ₹10,000 का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं।
मछली पालन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इस नियम का पालन करें और मछलियों के संरक्षण में सहयोग दें।


