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रायपुर// छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नए वन बल प्रमुख यानी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) की नियुक्ति कर दी है। 1994 बैच के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी अरुण पांडेय को राज्य का नया पीसीसीएफ नियुक्त किया गया है। इस संबंध में बुधवार को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया।
मंत्रालय में 25 मई को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में अरुण पांडेय के नाम पर सहमति बनी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव जेपी पाठक ने नियुक्ति आदेश जारी किया।
मूल रूप से सरगुजा संभाग के अंबिकापुर निवासी अरुण पांडेय वर्तमान में पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वन प्रशासन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में लंबे अनुभव तथा बेहतरीन कार्यप्रदर्शन के आधार पर यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे अगले लगभग 13 महीनों तक इस शीर्ष पद पर अपनी सेवाएं देंगे।
सरकार ने इस नियुक्ति के जरिए दो वरिष्ठ अधिकारियों कौशलेंद्र सिंह और अनिल साहू को सुपरसीड किया है। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से वन विभाग में शीर्ष पद को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। इससे पहले यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वर्तमान वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव को सेवा विस्तार दिया जा सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने एक्सटेंशन की परंपरा को आगे नहीं बढ़ाते हुए नए नेतृत्व पर भरोसा जताया। चूंकि 30 और 31 मई को शासकीय अवकाश रहेगा, इसलिए मौजूदा पीसीसीएफ वी. श्रीनिवास राव 29 मई को सेवानिवृत्त होंगे और उसी दिन शाम को अरुण पांडेय नए वन प्रमुख के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
अरुण पांडेय को प्रशासनिक कार्यों में मजबूत पकड़ और वाइल्ड लाइफ सेक्टर में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। उनके कार्यकाल में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। राज्य जैव विविधता बोर्ड में पदस्थ रहते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ में पहली बार रामसर साइट की पहचान और खोज की दिशा में काम शुरू कराया था। यह पहल राज्य की पर्यावरणीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जाती है।
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अरुण पांडेय के नेतृत्व में वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और वन्यजीव सुरक्षा के क्षेत्र में नई योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष, जंगलों के संरक्षण और इको-टूरिज्म जैसे विषयों पर उनका अनुभव विभाग के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।



